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संबलपुर में श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं शतचंडी महायज्ञ के भव्य समापन में शामिल हुए लेखराम साहू

धमतरी- शारदीय क्वार नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम संबलपुर स्थित कालिका पीठेश्वर धाम में 11 से 19 अक्टूबर तक आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं शतचंडी महायज्ञ अनुष्ठान का श्रद्धा, भक्ति, आध्यात्मिक उल्लास एवं धार्मिक गरिमा के साथ समापन हुआ। इस दिव्य धार्मिक आयोजन का आयोजन सुरेश बागमार एवं श्रीमती उषा बागमार, निवासी केशकाल-रायपुर द्वारा किया गया। आयोजन में श्री लक्ष्मी नारायण सेवा समिति, संबलपुर ने विशेष सहयोग प्रदान किया। संपूर्ण अनुष्ठान में कालिका पीठेश्वर धाम के परम पूज्य भागवताचार्य श्री ज्ञानेश्वर जी महाराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं को देवी महात्म्य, शक्ति उपासना, धर्म, संस्कार, नारी सम्मान तथा लोककल्याण की प्रेरणादायी शिक्षाओं का लाभ प्राप्त हुआ।
नौ दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में देवी भगवती की महिमा, उनकी दिव्य लीलाओं, वात्सल्य, करुणा, प्रेम, त्याग एवं शक्ति स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रतिदिन आयोजित कथा एवं धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा मां भगवती की आराधना कर आध्यात्मिक शांति, आत्मचिंतन एवं सदाचारपूर्ण जीवन की प्रेरणा प्राप्त की। आयोजन स्थल पर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का विशेष वातावरण बना रहा।
श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान परम पूज्य श्री ज्ञानेश्वर जी महाराज ने मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों, उनकी महिमा तथा दैवीय शक्तियों का वर्णन करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन, करुणा, ममता एवं संस्कारों का आधार माना गया है। मां दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी तथा देवी के अन्य दिव्य स्वरूपों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कथा के प्रसंगों में महिषासुर मर्दिनी तथा रंभ-कुंभ से संबंधित वर्णनों के माध्यम से धर्म और अधर्म, सदाचार और दुराचार तथा सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों के बीच संघर्ष को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया गया। इन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह प्रेरणा दी गई कि अन्याय, अहंकार और अत्याचार का अंत सत्य, धर्म, साहस एवं शक्ति के माध्यम से संभव है।
श्री लेखराम साहू अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञानेश्वर महाराज जी बहुत ही सरल स्वभाव एवं लोगों के समस्या निवारण करने में बहुत ही पहुंचे हुए महाराज हैं लोगों की विचारधारा को सही रास्ता दिखाना महाराज जी का प्रथम लक्ष्य है नारी के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण विकसित करने, महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने, बालिकाओं को उचित अवसर प्रदान करने तथा समाज में समानता और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने धार्मिक कथाओं को केवल श्रवण तक सीमित न रखकर उनके संदेशों को दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां परिवार मजबूत होते हैं, संस्कार विकसित होते हैं और राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस प्रकार श्रीमद् देवी भागवत कथा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक सद्भाव और सशक्त राष्ट्र निर्माण का प्रेरणादायी संदेश भी दिया।
पंचमी तिथि का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रहा। इस अवसर पर सच्चियाय माता एवं पद्मावती देवी का विशेष रात्रिकालीन पूजन-अर्चन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ देवी आराधना में सहभागिता की तथा मां के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। देवी की आराधना के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, करुणा, सदाचार, आत्मसंयम तथा जीवन में सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा मिली। विभिन्न पारिवारिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए लोगों ने एक साथ पूजा-अर्चना कर धार्मिक एकता एवं सांस्कृतिक समन्वय का परिचय दिया।
अष्टमी तिथि का विशेष महत्व रहा। इस अवसर पर मां दुर्गा की आराधना करते हुए दुर्गा सप्तशती के मंत्रों एवं श्लोकों का पाठ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक विधि-विधान तथा हवन-अनुष्ठान के साथ मां भगवती के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया गया।
शतचंडी महायज्ञ के अंतर्गत विशेष यज्ञीय अनुष्ठान संपन्न किए गए। गायत्री मंत्र तथा नवार्ण मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन में आहुतियां अर्पित की गईं। यज्ञ में घी, शक्कर, शहद तथा आम, गन्ना, अंगूर सहित विभिन्न प्राकृतिक वनस्पतियों एवं पूजा सामग्री का उपयोग किया गया। मंत्रोच्चार और हवन की पवित्र आहुतियों के बीच श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण, परिवारों की सुख-समृद्धि, समाज में शांति तथा मानवता के कल्याण की भावना के साथ सहभागिता की।
यज्ञ के माध्यम से भारतीय सनातन परंपरा में वर्णित प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पर्यावरण संरक्षण, सामूहिक कल्याण तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश भी सामने आया। धार्मिक अनुष्ठान ने उपस्थित जनसमुदाय को भारतीय संस्कृति की प्राचीन यज्ञ परंपरा एवं सामूहिक प्रार्थना के महत्व से परिचित कराया।
श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं शतचंडी महायज्ञ का आयोजन बागमार परिवार की पहल पर संपन्न हुआ, जो जैन परिवार से संबंधित है। आयोजन के दौरान परिवार से जुड़े अनेक रिश्तेदारों, परिचितों तथा स्थानीय श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से उपस्थित होकर कथा श्रवण एवं धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ लिया। विशेष बात यह रही कि अनेक लोगों ने अपने जीवन में पहली बार श्रीमद् देवी भागवत कथा का श्रवण किया। उनके लिए यह अनुभव नवीन, प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय रहा। पहली बार कथा सुनने वाले श्रद्धालुओं को देवी महात्म्य, भारतीय धार्मिक परंपराओं, नारी शक्ति, भक्ति, सदाचार एवं आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। इससे यह संदेश भी प्रसारित हुआ कि धार्मिक साहित्य और आध्यात्मिक ज्ञान व्यक्ति को अपने जीवन में नैतिकता, करुणा, संयम तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा प्रदान कर सकते हैं।
बागमार परिवार की इस पहल ने पारिवारिक सहभागिता, धार्मिक समर्पण और सामाजिक जुड़ाव का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। आयोजन को सफल बनाने में श्री लक्ष्मी नारायण सेवा समिति, संबलपुर के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आयोजन से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाओं, समन्वय तथा धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन में सक्रिय सहभागिता निभाई। समिति का उद्देश्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में सद्भाव, संस्कार, सेवा भावना, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देना है। इसी भावना के अनुरूप समिति ने इस आयोजन में विशेष सहयोग प्रदान किया तथा श्रद्धालुओं को धार्मिक कार्यक्रमों से जोड़ने में योगदान दिया। समिति के सदस्यों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने, पारस्परिक सहयोग की भावना विकसित करने, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम भी बनते हैं।
इस कार्यक्रम में लेख राम साहू पूर्व विधायक कुरूद एवं राष्ट्रीय समन्वयक पिछड़ा वर्ग कांग्रेस नई दिल्ली समिति के प्रमुख पदाधिकारियों में संरक्षक श्रीमती दुर्गेशनंदिनी एवं अशोक गुप्ता, अध्यक्ष महावीर सिन्हा, कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र साहू, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर सिन्हा एवं प्रमोद शर्मा, सचिव श्रीमती बरखा साहू, कोषाध्यक्ष दुष्यंत कुमार, कार्यक्रम संयोजक सुश्री दीपिका देवांगन, सहसचिव नीरज सोनी तथा उपकोषाध्यक्ष श्रीमती ममता पटेल सहित पुलकित सिन्हा, डूमन लाल ध्रुव, विकास साहू, मनसुख साहू, श्रीमती मीना बाबार एवं श्रीमती विनोदिनी यादव की सक्रिय सहभागिता रही।
आयोजन की स्मृतियां श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक एकता और नारी शक्ति के सम्मान का संदेश देने वाला यह अनुष्ठान संबलपुर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में एक उल्लेखनीय आयोजन के रूप में याद किया जाएगा।

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