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राजयोग अभ्यास द्वारा तन-मन की स्थिरता से बिना पलकें झपकाए मूर्त रूप में प्रकट होती चैतन्य देवियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र

धमतरी- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, धमतरी द्वारा शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित चैतन्य देवियों की अलौकिक झांकी के शुभारंभ माननीय भ्राताओंकार साहू विधायक धमतरी, लेखराम साहू पूर्व विधायक धमतरी,रोटेरियन सत्येंद्र शर्मा अध्यक्ष रोटरी क्लब ऑफ धमतरी, लायन शकुन्तला साहू अध्यक्ष लायंस क्लब धमतरी फ्रेंड्स, रोटेरियन जागृति दोशी सचिव रोटरी क्लब, काजल सिन्हा पूर्व अध्यक्ष लेडीज क्लब धमतरी, दीप चंद भारती राजस्व निरीक्षक भू अभिलेख शाखा जिला कार्यालय धमतरी डॉ अमर सिंह साहू प्रोफेसर पीजी कॉलेज बीजापुर, श्रीमती सरला जैन वरिष्ठ नेत्री भाजपा ने पूजा ,अर्चना दीप प्रज्ज्वलन और मंगल आरती कर चैतन्य देवियों के शक्ति स्वरूपों के दर्शन के बाद से ही दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग रही हैं। झांकी के चौथे दिन विधायक श्री ओंकार साहू ने भी झांकी के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
ध्वनि एवं प्रकाश के सुंदर समायोजन के बीच शिवलिंग से एक के बाद एक जड़ मूर्ति के समान चैतन्य देवियों का प्रकट होना और भक्तों को दर्शन देना श्रद्धालुओं के लिए अलौकिक एवं दिव्य अनुभूति का केंद्र बना हुआ है।
यह चैतन्य देवियों की झांकी केवल देवी दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक शक्तियों को पहचानने और स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा भी देती है। यह झांकी मन की अशांति को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने तथा अष्टभुजाधारी मां दुर्गा की आठ शक्तियों को अपने जीवन में धारण करने का संदेश देती है। भारत की प्राचीन राजयोग ध्यान पद्धति के माध्यम से इन आंतरिक शक्तियों को जागृत कर अपने व्यवहार में लाना ही इसका मुख्य उद्देश्य है।
चैतन्य देवियों के रूप में विराजित ब्रह्माकुमारी बहनें प्रतिदिन राजयोग का अभ्यास करती हैं। इसी अभ्यास से प्राप्त तन-मन की स्थिरता के कारण वे बिना पलकें झपकाए लंबे समय तक मूर्ति के समान अचल अवस्था में विराजित रहती हैं। उनके इस अद्भुत स्वरूप को देखकर दर्शनार्थी आश्चर्यचकित रह जाते हैं और सहज ही विश्वास नहीं कर पाते कि उनके सामने साक्षात् चैतन्य देवियां विराजमान हैं।झांकी में देवी स्वरूपों की शुद्धता, पवित्रता एवं दिव्यता सभी को आकर्षित कर रही है। इसका संदेश है कि यदि हम भी अपने जीवन में शिव की शक्तियों को धारण करना चाहते हैं, तो हमें बुराइयों, अशुद्धियों, नकारात्मकता, व्यसनों, ईर्ष्या एवं द्वेष का त्याग करना होगा। जब हम अपने मन और विचारों को शुद्ध बनाएंगे, तभी हमारे जीवन में भी शुद्धता, पवित्रता एवं सकारात्मकता का संचार होगा। यही चैतन्य देवियों की इस झांकी का मूल संदेश है।

पांच दिवसीय राजयोग शिविर का आयोजन

इस अवसर पर 21 अक्टूबर से पांच दिवसीय राजयोग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर का समय प्रातः 7 से 8 बजे, संध्या 5 से 6 बजे अथवा संध्या 7 से 8 बजे तक रहेगा। इच्छुक व्यक्ति अपनी सुविधानुसार किसी भी एक समय पर शिविर में सम्मिलित होकर राजयोग का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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