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पिछले 32 सालों से माघ पूर्णिमा पर कोदोरास में लग रहा भव्य मेला

कोदोरास अन्नपूर्णा धाम में माता के दर्शन व मेले में शामिल होने उमड़ी हजारों की भीड़


हजारों श्रद्धालुओं ने खारून नदी में किया पुण्य स्नान
धमतरी। आज माघ पूर्णिमा पर हर साल की भांति कोदोरास मेले का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक कोदोरास अन्नपूर्णा धाम जिला मुख्यालय धमतरी से 25 कि.मी. वि.खं. मुख्यालय कुरूद से 35 कि.मी. तहसील मुख्यालय भखारा से 15 कि.मी. दूर अंतिम छोर पर धमतरी, दुर्ग, बालोद जिला के संगम स्थल पास छत्तीसगढ़ की पवित्र नदी खारून के तट पर ग्राम सिलौटी में स्थित है।
कोदोरास का इतिहास पौराणिक है। बताया जाता है कि माता कोदोरास अन्नपूर्णा आज केवल ग्राम के ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र के साथ-साथ दूर-दूर तक के लोगों के आस्था श्रद्धा व विश्वास का केन्द्र है। लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और हर्षित मन से वापस लौटते हैं। गांव के किसी भी घर में कोई भी कार्यक्रम हो प्रथम निमंत्रण माता कोदोरास के नाम से जाता है।
बुजुर्गों के अनुसार आज से लगभग 300 से 400 वर्ष पहले तक ग्राम सिलौटी बस्ती यहीं शीतला मंदिर, ठाकुर देव के आसपास ही था, जिनके अवशेष आज भी खुदाई करने से मिलते हैं। पहले यह स्थान नदी के किनारे होने से बारिश में बाढ़ आने के कारण डूबने की स्थिति में आ जाता था। जिनसे जन-धन की बहुत ही हानि होती थी, तो उस समय के लोगों ने अपने घर द्वार यहां से छोड़कर सुरक्षित स्थान वर्तमान बस्ती जो 2 कि.मी. दूर दक्षिण दिशा में स्थित है में अवस्थित हुये।
बुजुर्ग बताते हैं कि माता कोदोरास का अस्तित्व व पूजा पाठ आदि युग से चली आ रही है। पहले यहां पर एक छोटा सा चबूतरा जैसा हुआ करता था। जिसमें सन् 1972 में जन सहयोग से मंदिर बनाने का प्रयास शुरू हुआ। धन की कमी के कारण मंदिर केवल आधा अधूरा ही बना और लगभग 20 वर्षों तक ऐसा ही रहा। भव्य मंदिर 1994 में बनकर तैयार हुआ तभी से यहां हर वर्ष माघ पूर्णिमा के अवसर पर कोदोरास मेला की शुरूआत हुई।
मंदिर परिसर में बनी है बाबा गोरखनाथ की समाधि
गोरखनाथ बाबा जी माता कोदोरास की सेवा करते करते 2009 में पंचतत्व में विलीन हुये जिनका समाधि स्थल मंदिर परिसर में ही बनाया गया है। समय के साथ-साथ यहां विभिन्न देवी-देवताओं जैसे हनुमान जी जगन्नाथ जी, कर्मा माता, बुढ़ा देव, राधा कृष्ण, शीतला माता, दुर्गा माता, घांसीदास, राम-जानकी, शनिदेव भोले बाबा, नंदी महराज, काठादेव के मंदिरों का निर्माण उनके भक्तों व विभिन्न समाज के द्वारा किया गया है।
नवरात्र में जलती है ज्योत, निकलती है महाप्रभु जगन्नाथ रथयात्रा
सन् 1994 से अनवरत प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा के अवसर पर भव्य कोदोरास अन्नपूर्णा मेला लगते आ रहा है। श्रद्धालु अल सुबह उठकर पवित्र खारून नदी में स्नान कर कोदोरास माता के दर्शन कर अपने भाग्य की सराहना कर आशीर्वाद लेते हैं। चैत्र व क्वांर नवरात्रि में यहां मनोकामना ज्योत भी जलाई जाती है। महाप्रभु जगन्नाथ रथयात्रा के अवसर पर यहां रथयात्रा भी निकाली जाती है, इस दिन भी यहां एक छोटा सा मेला लगता है।

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