सार्थक के विशेष बच्चों की कलात्मक राखियों ने जीता दिल
रूपल जैन लोढा ने कहा—बच्चों की मेहनत और हुनर को प्रोत्साहन देना हम सभी की जिम्मेदारी

धमतरी। सार्थक स्कूल के विशेष बच्चों के सहयोग से तैयार की गई हस्तनिर्मित एवं कलात्मक राखियों और शगुन के लिफाफों की प्रदर्शनी एवं बिक्री का आयोजन 18 अगस्त को बिपिन दोशी एवं रसीला बेन दोशी के निवास, रत्नाबांधा रोड, धमतरी में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रदर्शनी में शहर की उत्कृष्ट कलाकार सुश्री प्रार्थना दुग्गड़ की हस्तनिर्मित सुंदर आरती की थालियां, शुभ-लाभ हैंगिंग, तोरण एवं अन्य सजावटी सामग्री भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी का उद्घाटन कल्पवृक्ष जैन महिला ट्रस्ट की अध्यक्ष श्रीमती रूपल जैन लोढा ने रिबन काटकर किया। सार्थक स्कूल के बच्चों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीमती स्वाति लोढा एवं हर्षा कोचर भी उपस्थित रहीं। सार्थक के यज्ञदत्त, मनीषा, ईशु, कुलदीप,एकलव्य एवं वत्सला ने उत्साहपूर्वक अपने हाथों से बनाई राखियां अतिथियों को दिखाईं। अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा एवं मेहनत की सराहना की तथा राखियां और शगुन के लिफाफे खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया। रूपल जैन लोढा ने कहा—विशेष बच्चों की प्रतिभा को अवसर और सम्मान मिलना जरूरी। श्रीमती रूपल जैन लोढा ने कहा कि विशेष बच्चों द्वारा इतनी सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार करना उनकी प्रतिभा, मेहनत और प्रशिक्षण का परिणाम है। बच्चों के उत्साह और मेहनत से प्रभावित होकर श्रीमती रूपल जैन लोढा, श्रीमती स्वाति लोढा एवं हर्षा कोचर की ओर से सार्थक के राखी मेकर्स बच्चों को प्रोत्साहन राशि एवं चॉकलेट्स के बॉक्स उपहार में दिए गए। छह वर्षों से राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस वर्ष भी सार्थक के बच्चों ने हुनर दिखाया। उन्होंने क्रिस्टल बॉल्स, रंग-बिरंगे मोतियों, फूल-पत्ती, मोरपंखी वीरा, स्वीट ब्रदर पेंडल सहित विभिन्न सजावटी सामग्रियों का उपयोग कर मोली एवं अलग-अलग डोरियों में आकर्षक राखियां तैयार की हैं। सार्थक की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी ने बताया प्रदर्शनी में रखी अधिकांश राखियां बच्चों ने स्वयं तैयार की हैं। इसके पीछे प्रशिक्षकों की मेहनत भी महत्वपूर्ण है, जिसका सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनी में राधिका जोशी, नेहा लोढा, अर्चना नीरज नेताम, ज्योति शांडिल्य, संतोष शाह, सुलेखा जोशी, विशाल शाह, मोना शाह एवं रेखा कुकरेजा सहित अनेक लोगों ने राखियां एवं अन्य सामग्री खरीदी। उन्होंने कहा कि, इन राखियों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें विशेष बच्चों ने अपने हाथों से बनाया है।
