धमतरी निगम में तानाशाही, राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से महापौर ने स्वास्थ्य विभाग सभापति को हटाया – -कांग्रेस पार्षद

धमतरी। धमतरी नगर निगम की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। जिस पर तंज कसते हुए कांग्रेस पार्षदों ने कहा है कि भवन अनुज्ञा में अनियमितताओं पर सभापति कौशिल्या देवांगन ने सवाल उठाया था जिसका समर्थन स्वास्थ्य विभाग सभापति नीलेश लुनिया ने किया था, अवैध वसूली के खिलाफ भवन अनुज्ञा से जुड़े मामले में सवाल उठाए थे। पारदर्शिता की मांग की थी। लेकिन सवाल का जवाब देने के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रतिष्ठित समाज से आने वाले स्वास्थ्य विभाग प्रभारी नीलेश लुनिया को हटाया गया। नेता प्रतिपक्ष दीपक सोनकर,उप नेता प्रतिपक्ष विशु देवांगन, योगेश लाल,सूरज गहरवाल ने इस फैसले को तानाशाही और सवाल पूछने पर सजा करार दिया है। कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि नगर निगम में लोकतंत्र खत्म हो गया है। अगर कोई जनप्रतिनिधि भवन अनुज्ञा में गड़बड़ी पर सवाल पूछता है तो उसे सजा दी जाती है। यह तानाशाही है। निगम की आपसी लड़ाई अब चरम पर पहुंच चुकी है।
महिला पार्षद पूर्णिमा गजानंद रजक, सुमन सोमेश मेश्राम, रामेश्वरी कोसरे ,उमा भागी ध्रुव में नए नियुक्ति पर भी सवाल उठाये। कहा सबसे हैरान करने वाला फैसला यह है कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी राजस्व एवं बाजार सलाहकार समिति के प्रभारी सदस्य को दी गई है, जो खुद कई बार कह चुके हैं कि वे निजी कारणों से अपना वर्तमान विभाग भी नहीं संभाल पा रहे हैं। जो व्यक्ति खुद अपने विभाग को निजी कारणों से नहीं संभालने की बात कहता आ रहा है, उसे शहर के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी देना समझ से परे है।
कांग्रेस पार्षदों ने पूछे 3 सवाल
कांग्रेस पार्षदो ने तीन सवाल पूछे है जिनमें क्या भवन अनुज्ञा में इतनी गड़बड़ी है कि सवाल पूछने पर स्वास्थ्य विभाग सभापति को हटाना पड़ा? निगम में सवाल पूछना गुनाह है क्या? यह कैसा लोकतंत्र है? जो अपना विभाग नहीं संभाल पा रहे, उन्हें स्वास्थ्य विभाग क्यों दिया गया? इसके पीछे क्या कारण है? कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और भवन अनुज्ञा के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
