Uncategorized

बच्चों के पोषण, देखभाल और शिक्षा का एकीकृत केंद्र बन रहे ‘लइका घर’

एक ही परिसर में प्रारंभिक बाल देखभाल, आंगनबाड़ी और विद्यालय की सुविधा से कुपोषण दूर करने तथा शाला त्याग की प्रवृत्ति रोकने की पहल

धमतरी जिले में 130 लइका घर संचालित, इस वर्ष 40 नए केंद्र शुरू करने की योजना

धमतरी- बच्चों का स्वस्थ बचपन, समुचित पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा किसी भी समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। इसी सोच के साथ धमतरी जिले में संचालित ‘लइका घर’ बच्चों की देखभाल, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को एक साथ जोड़ने वाले महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। इनका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करना है। प्रारंभिक अवस्था में ही बच्चों की जरूरतों पर ध्यान देकर कुपोषण की समस्या को दूर करने, सीखने की क्षमता विकसित करने और शिक्षा से निरंतर जोड़े रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है।

एक परिसर में बचपन से विद्यालय तक की सुविधा

नगरी विकासखंड के ग्राम सियादेही में लइका घर, आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक शाला एक ही परिसर में संचालित हैं। यहां सात माह से तीन वर्ष तक के बच्चों की देखभाल एवं विकासात्मक गतिविधियों के लिए लइका घर, तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी तथा इसके बाद प्राथमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध है। प्राथमिक शाला के बाद समीप स्थित माध्यमिक विद्यालय में आगे की पढ़ाई जारी रखने का अवसर भी मिलता है। इस व्यवस्था से बच्चों के विकास के विभिन्न चरणों को आपस में जोड़ते हुए प्रारंभिक देखभाल से लेकर विद्यालयीन शिक्षा तक निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

एक ही परिसर में सुविधाएं उपलब्ध होने से अभिभावकों को बच्चों की देखभाल और शिक्षा के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की परेशानी कम होती है। साथ ही, बच्चों की नियमित उपस्थिति, विद्यालय में सहज प्रवेश और शिक्षा के प्रति रुचि विकसित करने में मदद मिलती है। प्रारंभिक उम्र से ही बच्चों को सीखने का अनुकूल वातावरण मिलने पर आगे की पढ़ाई के प्रति उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हो सकता है।

खेल-खेल में सीखने और सर्वांगीण विकास पर जोर

लइका घरों में रंग-बिरंगे शैक्षणिक चित्रों, अक्षरों, अंकों, फल-सब्जियों, पशु-पक्षियों तथा दैनिक जीवन से जुड़ी सामग्री के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में सीखने के अवसर दिए जा रहे हैं। आयु के अनुरूप खेल सामग्री, रचनात्मक गतिविधियां, बातचीत और सहभागितापूर्ण अभ्यास बच्चों की जिज्ञासा, भाषा कौशल, कल्पनाशक्ति और सामाजिक व्यवहार विकसित करने में सहायक होते हैं। स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण, नियमित देखभाल और पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान देकर बच्चों के स्वस्थ विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बचपन के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण, स्नेहपूर्ण देखभाल और सीखने के अवसर विशेष महत्व रखते हैं। ऐसे में लइका घरों को आंगनबाड़ी सेवाओं और विद्यालयों के साथ बेहतर समन्वय से संचालित करना बच्चों की जरूरतों को समय पर पहचानने तथा उन्हें विकास के अनुकूल अवसर उपलब्ध कराने में उपयोगी हो सकता है।

जिले में लइका घरों के विस्तार की कार्ययोजना

धमतरी जिले में लइका घरों का दायरा बढ़ाने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में नगरी विकासखंड में 124 लइका घर संचालित हैं। इस वर्ष यहां 40 और केंद्र शुरू करने की योजना है। वहीं मगरलोड विकासखंड में वर्तमान में छह लइका घर संचालित हैं। अक्टूबर माह के अंत तक दो अतिरिक्त केंद्र शुरू करने की योजना से इनकी संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। दिसंबर 2026 तक मगरलोड में 12 और लइका घर शुरू करने की योजना है, जिससे वहां कुल संख्या 20 तक पहुंच सकेगी। लइका घरों अजीम प्रेमजी जी फाउंडेशन के सहयोग से संचालित किए जा रहे है ।

लइका घरों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर देखभाल और प्रारंभिक विकास की सुविधाएं सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इनके प्रभावी संचालन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता अहम होगी।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि बच्चों का समुचित पोषण, सुरक्षित देखभाल और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करना राज्य शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘लइका घर’ के माध्यम से छोटे बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, पोषण और सीखने का अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
लइका घर, आंगनबाड़ी और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय से बच्चों के विकास को निरंतरता मिलेगी तथा उन्हें प्रारंभ से ही शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जिले में इन केंद्रों के विस्तार की योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकाधिक बच्चों तक बाल हितैषी सुविधाएं पहुंचाना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय की सहभागिता आवश्यक है, ताकि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।

सशक्त बचपन से समृद्ध भविष्य की ओर

लइका घर केवल बच्चों की देखभाल का केंद्र नहीं, बल्कि उनके जीवन की शुरुआती नींव मजबूत करने का माध्यम हैं। पोषण, स्वास्थ्य, खेल, सीखने और शिक्षा को परस्पर जोड़ने वाली यह व्यवस्था बच्चों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्रदान कर सकती है। योजनाबद्ध विस्तार, नियमित निगरानी और समुदाय के सहयोग से इन केंद्रों को बाल हितैषी वातावरण के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है। स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षित बचपन के निर्माण से ही एक सशक्त समाज और समृद्ध भविष्य की दिशा प्रशस्त होती है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!