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आदिवासी साहित्य की सशक्त आवाज एवं जिला हिंदी साहित्य समिति के समर्पित सक्रिय अध्यक्ष डुमन लाल ध्रुव को मिलेगा शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति राज्य अलंकरण

साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 में होंगे सम्मानित

मुजगहन सहित धमतरी और छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान

धमतरी – छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, लोकभाषा और साहित्यिक विरासत को अपनी लेखनी के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सतत जुटे ग्राम मुजगहन निवासी श्री डुमन लाल ध्रुव को वर्ष 2026 के शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति राज्य अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस राज्योत्सव समापन समारोह में 03 नवम्बर, 2026 को सायं 6.00 बजे राज्योत्सव मैदान, नवा रायपुर अटल नगर में मुख्य अतिथि अमित शाह गृह मंत्री,अध्यक्षता विष्णु देव साय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़, विशिष्ट अतिथि अरुण साव, उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़, विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़, रामविचार नेताम, मंत्री, दयाल दास बघेल, मंत्री केदार कश्यप, मंत्री लखन लाल देवांगन, मंत्री, श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्री ओ.पी. चौधरी, मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मंत्री टंकराम वर्मा, मंत्री
राजेश अग्रवाल, मंत्री,गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री गजेन्द्र यादव, मंत्री , डॉ. चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष बृजमोहन अग्रवाल, सांसद राजेश मूणत, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक मोती लाल साहू, विधायक, सुनील सोनी, विधायक
अनुज शर्मा,विधायक इंद्र कुमार साहू, विधायक समस्त सांसद, विधायक, निगम मंडल, आयोग, जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यगण तथा महापौर की गरिमामयी उपस्थिति में राज्य अलंकरण से अलंकृत होंगे।
साहित्यकार डुमन लाल ध्रुव साहित्य, सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मिलने वाला यह सम्मान उनके व्यक्तिगत साहित्यिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान ग्राम मुजगहन, धमतरी जिले, छत्तीसगढ़ राज्य और संपूर्ण आदिवासी समाज के लिए गौरव का विषय है। साहित्य के क्षेत्र में इस राज्य अलंकरण से सम्मानित होने वाले वे पहले आदिवासी साहित्यकार हैं। उनकी यह उपलब्धि जनजातीय समाज की रचनात्मक प्रतिभा, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक सामर्थ्य को नई पहचान देने वाली है।
डुमन लाल ध्रुव का जन्म 17 सितंबर 1974 को हुआ। एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त श्री ध्रुव की रुचि साहित्य, संगीत, संस्कृत, भारतीय कला के इतिहास और संस्कृति में रही है। उन्होंने अपनी लेखनी को छत्तीसगढ़ के लोकजीवन, जनजातीय अस्मिता, सामाजिक सरोकारों, लोककलाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का माध्यम बनाया है।
उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकजीवन की सहजता, जनसामान्य की संवेदनाएं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गहरा अनुराग दिखाई देता है। वे छत्तीसगढ़ी लोककला और लोकभाषा के प्रबल पक्षधर हैं। उनके साहित्य में स्थानीय संस्कृति के विविध रुपों को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक अपनी विरासत पहुंचाने की प्रतिबद्धता भी दिखाई देती है। श्री ध्रुव की साहित्यिक यात्रा बहुआयामी रही है। आकाशवाणी रायपुर एवं जगदलपुर केंद्रों से उनकी कविताओं, कहानियों, लेखों और नाटकों का नियमित प्रसारण होता रहा है। देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। उनकी लेखनी ने पाठ्यक्रम निर्माण, साहित्यिक समीक्षा, लोकसंस्कृति के अध्ययन और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विषयों पर भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
छत्तीसगढ़ की पाठ्यपुस्तकों की कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के लिए पाठ्यक्रम लेखन में उनका योगदान रहा है। एम.ए. पूर्व स्तर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के पाठ्यक्रम में भी उनका लेख शामिल किया गया है। उनकी रचनाओं के अंश विभिन्न शोध प्रबंधों में उद्धृत किए गए हैं। छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह ‘मन के पांखी’ पर बस्तर विश्वविद्यालय और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सात विद्यार्थियों द्वारा शोध कार्य किया जाना उनकी साहित्यिक रचनाधर्मिता और अकादमिक महत्त्व को रेखांकित करता है।
इतिहास और जनचेतना के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। आकाशवाणी रायपुर के लिए उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक चेतना पर केंद्रित ‘1857 की रणभैरी’ नामक 13 कड़ियों की छत्तीसगढ़ी धारावाहिक श्रृंखला का लेखन किया। यह कार्य स्थानीय इतिहास को जनसामान्य तक पहुंचाने की उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक है।
श्री ध्रुव की प्रकाशित कृतियों की सूची उनके व्यापक अध्ययन, विषयगत विविधता और निरंतर साहित्य साधना का प्रमाण है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘अंजोर बांटे के पहिली’, ‘छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक परिदृश्य’, ‘पैदल जिंदगी का कवि – नारायण लाल परमार’, ‘भाषा के भोजपत्र पर विप्लव की अग्नि – ऋचा मुकीम भारती’, ‘अमरित बांटिस जग ला – भगवती सेन’, ‘मेहतर राम साहू’, ‘महत्व – त्रिभुवन पांडे’ और ‘सप्तपर्णी’ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ‘सोनाखान का सिंह शहीद वीरनारायण सिंह’, ‘वीरांगना रानी दुर्गावती’, ‘लोक जीवन के बदलते संदर्भ में’, ‘मन के पांखी’ (छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह), ‘छत्तीसगढ़ का लोक आभूषण’, ‘प्रचलित परंपरा से लोक का अर्थ’, ‘बलिदान एवं प्रेरणा की विरासत’ तथा ‘जनजातीय धरोहर का संरक्षण एवं संवर्धन’ जैसी कृतियों के माध्यम से उन्होंने लोकपरंपराओं, महापुरुषों, सांस्कृतिक मूल्यों और जनजातीय विरासत को साहित्य में स्थान दिया है। उनकी अन्य प्रमुख पुस्तकों में ‘संकल्प भारत विकसित भारत’, ‘वन्दे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर’, ‘छत्तीसगढ़ के गोदना’, ‘जिनगी बिरथा नई जाय’, ‘धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा’, ‘स्वर में बची पृथ्वी’ तथा ‘बस्तर आत्मा का आह्वान’ शामिल हैं। पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व और कला पर केंद्रित ‘स्वर में बची पृथ्वी’ उनकी सांस्कृतिक दृष्टि का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण है। इन कृतियों में छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं, जनजातीय जीवन, भाषा, आभूषण, गोदना कला, ऐतिहासिक नायकों और सांस्कृतिक अस्मिता के विविध आयामों को अभिव्यक्ति मिली है। उनकी साहित्य साधना का मूल उद्देश्य लोक की स्मृतियों को सहेजना, उपेक्षित सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ना है।
डुमन लाल ध्रुव साहित्य सृजन के साथ-साथ संगठनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे साहित्य संगीत सांस्कृतिक मंच, मुजगहन तथा धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष के रुप में साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करने तथा साहित्यिक वातावरण को समृद्ध बनाने के प्रयासों में उनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है। उनका व्यक्तित्व साहित्य, संगीत, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का समन्वित रुप है। उनका मानना है कि साहित्य समाज को जागरुक करने, मानवीय मूल्यों को मजबूत बनाने और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उनकी रचनात्मक सक्रियता इसी सोच को प्रतिबिंबित करती है।
श्री ध्रुव को उनके साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। इनमें उज्जैन का कला वैभव सम्मान, भिलाई का फिल्म फेस्टिवल सम्मान, बागबाहरा का नारायण लाल परमार स्मृति सम्मान, छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति रायपुर का स्वर्गीय मेहतर राम साहू स्मृति सम्मान तथा तुलसी मानस प्रतिष्ठान का सम्मान शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें सामाजिक सद्भाव समरसता सम्मान, संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राम राष्ट्रीय सौहार्द विषयक व्याख्यान के संदर्भ में सम्मान, विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन का सम्मान, प्रेरणा साहित्य सम्मान, छत्तीसगढ़ का सर्वोच्च चिन्हारी सम्मान, शिवनाथ स्वाभिमान सम्मान, हरेली नवा लेखक सम्मान और डॉ. बल्देव स्मृति सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। वर्ष 2026 में उन्हें दाऊ रामचन्द्र देशमुख बहुमत सम्मान, भगवतीलाल सेन छत्तीसगढ़ी लोकभाषा राष्ट्रीय तथागत सम्मान, प्रखर साहित्य गौरव सम्मान तथा जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अवसर पर भी सम्मानित किया गया है। इन उपलब्धियों के बीच शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति राज्य अलंकरण उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को मिलने वाली एक और महत्त्वपूर्ण पहचान है।
डुमन लाल ध्रुव को मिलने वाला यह राज्य अलंकरण व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक व्यापक अर्थ रखता है। यह उस लोकचेतना का सम्मान है जो गांवों की मिट्टी में जन्म लेती है और साहित्य के माध्यम से व्यापक समाज तक पहुंचती है। यह उस आदिवासी रचनाकार की साधना का सम्मान है जिसने अपनी लेखनी से जनजातीय समाज की पहचान, लोकभाषा की गरिमा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त अभिव्यक्ति दी है। उनकी उपलब्धि से ग्राम मुजगहन का नाम गौरवान्वित हुआ है। जिला हिंदी साहित्य समिति धमतरी ही नहीं अपितुधमतरी जिले के लिए यह गर्व का क्षण है और छत्तीसगढ़ की साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा के लिए प्रेरणादायी अवसर है। विशेष रुप से आदिवासी समाज के लिए यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और समाज की संवेदनाओं को साहित्य में स्थान देकर व्यापक पहचान अर्जित की जा सकती है. डुमन लाल ध्रुव की साहित्य यात्रा नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए प्रेरणा है। उनकी साधना बताती है कि अपनी जड़ों से जुड़कर किया गया साहित्य सृजन समाज की सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ उसे नई प्रतिष्ठा भी दिला सकता है। शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति राज्य अलंकरण के माध्यम से उनकी इसी दीर्घकालीन साधना, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और सामाजिक योगदान को सम्मान मिलने जा रहा है। यह सम्मान श्री डुमन लाल ध्रुव की उपलब्धि के साथ-साथ मुजगहन की माटी, धमतरी की साहित्यिक चेतना, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और आदिवासी समाज की गौरवशाली रचनात्मक परंपरा का भी सम्मान है।

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