अनुपयोगी शासकीय भवनों में शुरू होंगी आजीविका गतिविधियां, मशरूम उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पंचायतों में विकसित होंगे मशरूम उत्पादन केंद्र

धमतरी- ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से मुख्य कार्यपालन अधिकारी ( सीईओ) जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत खिसोरा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण औद्योगिक पार्क सहित विभिन्न विकास कार्यों एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों से निर्माण कार्यों की प्रगति, उपलब्ध अधोसंरचना तथा संसाधनों के उपयोग की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अधोसंरचना को योजनाबद्ध तरीके से आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाए। उन्होंने विकासखंड की सभी ग्राम पंचायतों में ऐसे शासकीय भवनों को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जो वर्तमान में खाली हैं अथवा जिनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। इन भवनों में मशरूम उत्पादन केंद्र विकसित करने की संभावनाओं का आकलन कर कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन कम स्थान में शुरू की जा सकने वाली आजीविका गतिविधि है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं एवं स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ ही नियमित आय के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके लिए प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, उत्पादन की व्यवस्था और बाजार से जुड़ाव पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि समूह उत्पादन के साथ-साथ विपणन के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन सकें।
इस दौरान ग्राम पंचायत खिसोरा स्थित ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) केंद्र में बोर खराब होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने संबंधित पंचायत सचिव को तत्काल बोर का परीक्षण कराकर आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासकीय परिसंपत्तियों का रखरखाव और उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों एवं पंचायतों की जिम्मेदारी है।सीईओ जिला पंचायत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायतों में उपलब्ध भवनों, परिसरों एवं अन्य संसाधनों का सर्वेक्षण कर उन्हें उपयोगी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार करें। साथ ही जहां आवश्यक हो, वहां व्यावसायिक परिसर विकसित करने की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास का उद्देश्य केवल अधोसंरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हुए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना भी है।