मध्यप्रदेश

खेतों से नीलगाय भगाने के लिए अफ्रीका के विशेषज्ञों की मदद लेगी शिवराज सरकार

मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में कई ऐसे जीव हैं जिनकी संख्या बड़ी मात्रा में मौजूद है. इन्हीं में से एक प्रजाति नीलगाय की है जो हिरणों का एक वर्ग विशेष है. मध्य प्रदेश के अंदर 30 से 35 जिले ऐसे हैं जिनमें किसानों के लिए नीलगाय सबसे बड़ा संकट है. इन जिलों के अंदर हालात यह हैं कि फसल आने की स्थिति में बड़ी संख्या में नील गायों के झुंड फसल पर हमला करते हैं और किसानों की फसलों को चौपट कर देते हैं मध्य प्रदेश के उज्जैन संभाग इंदौर संभाग और निमाड़ के क्षेत्रों में कई ऐसे जिले हैं जहाँ नील गायों का भारी आतंक है साथ ही साथ छिंदवाड़ा, रायसेन, टीकमगढ़, छतरपुर, नरसिंहपुर क्षेत्र भी नील गायों की समस्या से प्रताड़ित है.

इसी के चलते मध्यप्रदेश सरकार एवं वन विभाग ने नील गायों को पकड़ने के लिए अफ्रीकी विशेषज्ञ बुलाने की तैयारी की है इन सभी नील गायों को अफ्रीकी विशेषज्ञों की मदद से पकड़ा जाएगा और चीतों के नए आशियाने गांधी सागर अभ्यारण के वन्य क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा जिससे पर्यावरण संतुलन में भी मदद मिलेगी.

हेलीकॉप्टर के जरिए होगी नीलगायों की बाड़ाबंदी

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ हेलीकॉप्टर की मदद से नीलगायो की बाडाबंदी की जाएगी सूत्रों के अनुसार यह अभियान मध्यप्रदेश में अक्टूबर के दौरान चलाया जाना प्रस्तावित किया गया है इसके पहले भी बनने प्राणी बोर्ड की बैठक में मामला लगातार उठता रहा है. इसी के चलते प्रदेश सरकार ने अब दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों को मध्य प्रदेश में बुलाकर नील गायों की बाराबंदी करने और उन्हें पकड़ने हेतु एक विशिष्ट योजना बनाई है. इस योजना के अंतर्गत नील गायों को आंख कर इन जिलों से आरक्षित क्षेत्र में भेजा जाएगा जिससे पर्यावरण संतुलन भी स्थापित होगा. साथ ही साथ किसानों की समस्या भी समाप्त होगी

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