कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर और नीलम चंद्राकर ने खाया बोरे-बासी, दिया छत्तीसगढ़ी संस्कृति बचाने का संदेश

धमतरी। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर और उनके पति जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर ने बोरे-बासी खाकर छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने का संदेश दिया। इन्होंने प्याज, मिर्च, भाजी और चटनी के साथ बोरे-बासी का आनंद लिया। तारिणी चंद्राकर ने कहा कि बोरे-बासी सिर्फ भोजन नहीं, छत्तीसगढ़ की पहचान है। हमारे पुरखों का यह पारंपरिक आहार गर्मी में शरीर को ठंडक देता है, पाचन दुरुस्त रखता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। आज की पीढ़ी फास्ट फूड की ओर भाग रही है, जबकि बोरे-बासी सेहत का खजाना है। बोरे बासी को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बढ़ावा दिया था लेकिन वर्तमान सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, भाजपा सरकार को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परम्परा और खानपान से कोई मतलब नहीं है। नीलम चंद्राकर ने कहा कि मजदूर-किसान सुबह खेत-खलिहान जाने से पहले बोरे-बासी खाते थे। ये मेहनतकश लोगों की ताकत है। इसे शर्म नहीं, गर्व से खाना चाहिए।

