चातुर्मास के पूर्व परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. का श्रद्धा, भक्ति और उत्साह पूर्ण माहौल मे हुआ भव्य मंगल प्रवेश
श्री आदिश्वर जिनालय से प्रारंभ हुआ मंगल प्रवेश, सैकड़ो श्रद्धालु हुए शामिल, जगह-जगह गुरु भगवंत का पुष्प वर्षा, आरती एवं जयघोष के साथ हुआ भव्य स्वागत


धमतरी। जैन समाज के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत गौरवपूर्ण रहा। परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. (आदि ठाणा-4) का आज प्रात: धमतरी आगमन हुआ। उनके भव्य मंगल प्रवेश के साथ ही शहरभर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सुबह 8 बजे गोल बाजार स्थित श्री आदिश्वर जिनालय से मंगल प्रवेश यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा में जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। जगह-जगह गुरु भगवंत का पुष्पवर्षा, आरती एवं जयघोष के साथ भव्य स्वागत किया गया। पूरे मार्ग में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा के दौरान जैन समाजजनो में धर्म ध्वज लेकर सयंम अंहिसा, सद्भाव और मानवता का संदेश दिया।
परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. केवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महासाध्वी परम पूज्य निपुणा श्री जी म.सा. की सुशिष्या तथा संघ स्नेह वारिधि, प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी म.सा. की सुशिष्या हैं। उनके धमतरी आगमन को जैन समाज ने अपने लिए सौभाग्य एवं गौरव का विषय बताया।
चातुर्मास के दौरान होंगे रोजाना विविध धार्मिक आयोजन
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, तप, आराधना, सामायिक, प्रतिक्रमण तथा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में आत्मशुद्धि, संयम, सदाचार, संस्कार एवं आध्यात्मिक जागरण का संदेश प्रसारित करना है।
गुरु भगवंतो का आगमन समाज के लिए अत्यंत सौभाग्य का अवसर है
श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष विजय गोलछा एवं श्री चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र गोलछा ने बताया कि परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. का धमतरी आगमन पूरे समाज के लिए अत्यंत सौभाग्य का अवसर है। उनके सान्निध्य में समाज के सभी वर्गों को धर्म, संस्कार और सदाचार का अमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त होगा। संघ एवं चातुर्मास व्यवस्था समिति ने समस्त समाजजनों से पूरे चातुर्मास के दौरान आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में नियमित सहभागिता निभाने तथा आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
चातुर्मास का प्रत्येक दिन आत्मसाधना का दिन है – पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज सा.
चातुर्मास हेतु नगर प्रवेश के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज सा. ने कहा कि चातुर्मास केवल चार महीनों का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने, जीवन में संयम, तप, त्याग और सदाचार को स्थापित करने का पावन अवसर है। यह समय स्वयं के भीतर झांकने, आत्मचिंतन करने तथा अपने जीवन को धर्ममय बनाने का है। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुख आत्मा की शांति में निहित है। जब तक मनुष्य अपने भीतर के क्रोध, मान, माया, लोभ, ईष्र्या और अहंकार को समाप्त नहीं करेगा, तब तक जीवन में सच्ची प्रसन्नता प्राप्त नहीं हो सकती। धर्म हमें इन विकारों से दूर रहकर प्रेम, करुणा, क्षमा, मैत्री और अहिंसा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। गुरुदेव ने कहा कि चातुर्मास का प्रत्येक दिन आत्मसाधना का दिन है। इन चार महीनों में यदि व्यक्ति नियमित रूप से प्रवचन सुने, स्वाध्याय करे, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप, आयंबिल, उपवास एवं सेवा जैसे धार्मिक कार्यों से जुड़े तो उसका जीवन निश्चित रूप से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म को केवल सुनने तक सीमित न रखकर उसे अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।
