जीवन रंग तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ
95 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता के बावजूद चित्रकला को अपनाकर कुरुद के बसंत साहू ने जीवन को दी नई दिशा

कुरुद। बसंत फाउंडेशन छत्तीसगढ़, कुरूद द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जीवन रंग चित्रकला प्रदर्शनी का शुभारंभ छत्रपति शिवाजी मराठा मंगल भवन, धमतरी में किया गया। कार्यक्रम में कुरूद नगरपालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर, भखारा पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरख जैन, कुरूद विधानसभा के पूर्व विधायक लेखराम साहू, युवा समाजसेवी ऋतुराज पवार,मराठा समाज अध्यक्ष दीपक लौंढे, महेंद्र पंडित, चेतन हिंदुजा, दीपक लाखोटिया, कुरूद तहसील साहू समाज अध्यक्ष कृष्णकांत साहू,महिला समाज से राजुला शाह, मीनल गोलछा,भारत भूषण पंचायन, भारती साहू, समाजसेवी सरिता दोषी, लक्ष्मी सोनी, मनोज साहू, हेमंत माला, पूर्व अध्यक्ष चंद्रभूषण, ज्योतिष दादा, दादर सर, राजेश शर्मा सहित अनेक समाजसेवी, कला प्रेमी, अभिभावक एवं प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अतिथियों ने कला एवं प्रतिभाओं को दिया प्रोत्साहन
ज्योति भानु चंद्राकर ने कहा कि बच्चों में छिपी प्रतिभा को मंच प्रदान करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ह्यजीवन रंगö जैसे आयोजन बच्चों की कल्पनाशक्ति को नई दिशा देने के साथ उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचानने और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं। ज्योति हरख जैन ने कहा कि कला मनुष्य की भावनाओं और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। बच्चों और कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहन देने वाले ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। पूर्व विधायक लेखराम साहू ने कहा कि कला और संस्कृति हमारी पहचान हैं। प्रतिभावान बच्चों को उचित मंच और सम्मान मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है तथा वे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं। समाजसेवी सरिता दोशी ने कहा कि कला केवल चित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सोच, संवेदना और कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजनों में समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। बसंत फाउंडेशन छत्तीसगढ़, कुरूद के संस्थापक एवं आर्टिस्ट बसंत साहू ने सभी अतिथियों, कला प्रेमियों, समाजसेवियों, अभिभावकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुरुद के बसंत साहू ने 95 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता के बावजूद चित्रकला को अपनाकर जीवन को नई दिशा दी। उनकी कला ने उन्हें राष्ट्रीय दिव्यांगजन पुरस्कार दिलाया और वे हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने।