संतान कि दीर्घायु के लिए रखा जाता है हलषष्ठी का व्रत – कविता योगेश बाबर
जिला पंचायत सदस्य कविता योगेश बाबर ने कहा हल षष्ठी व्रत का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया इस दिन स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु के लिए उपवास रखती हैं और षष्ठी माता को प्रसन्न करती हैं ताकि उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हो और वह लम्बी आयु प्राप्त कर सके इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो कि इस प्रकार है
एक बार की बात है एक गांव में एक ग्वालिन रहती थी। वो बहुत गरीब थी। भाद्रपद के महीने में हलषष्ठी का दिन आया। उसने व्रत रखा
घर में खाने को कुछ नहीं था, तो वो जंगल में भैंस चराने गई। भैंस चरते-चरते जंगल में घास के साथ किसी के खेत का ज्वार-बाजरा भी खा गई।ग्वालिन को बहुत डर लगा। उसने सोचा किसी ने देखा तो नहीं। लेकिन ग्वालिन ने झूठ बोल दिया कि मेरी भैंस ने नहीं खाया।उसी पाप से उसके गर्भ में जो बच्चा था वो मर गया। ग्वालिन बहुत रोई। गांव की औरतों ने कहा – तूने हलषष्ठी के दिन झूठ बोला और दूसरे का अन्न खिलाया, इसलिए छठी माता नाराज हो गईं फिर ग्वालिन ने सच्चे मन से पश्चाताप किया। अगले साल फिर पूरी श्रद्धा से हलषष्ठी का व्रत रखा।बिना हल जुते अन्न का ही भोजन कियाभैंस के गोबर से छठी माता बनाई बलराम जी की पूजा की और दिन भर निर्जला रहीशाम को तिन्नी के चावल और भैंस के दूध से पारण किया छठी माता प्रसन्न हुईं। उसने आशीर्वाद दिया कि आगे से तेरी संतान दीर्घायु होगी।अगले ही साल ग्वालिन को एक सुंदर पुत्र हुआ, जो खूब फला-फूला।
तभी से मान्यता है कि हलषष्ठी के दिन सच्चे मन से व्रत करने और झूठ न बोलने से संतान की उम्र लंबी होती है और मरते हुए बच्चे भी जी जाते हैं।
कथा सुनने के बाद बोलना चाहिए हे छठी मैया, हे बलराम जी, जैसे ग्वालिन के बच्चे की रक्षा की, वैसे हमारे बच्चों की भी रक्षा करना।आज शाम पूजा के बाद भैंस के दूध से बने दही से ही प्रसाद ग्रहण करना चाहिये जिला पंचायत सदस्य कविता योगेश बाबर ने भी इस व्रत का पालन करते हुए व्रत रखा और ब्राह्मण पारा वार्ड में लता दुबे दीदी जी के घर षष्ठी माता की पूजा अर्चना कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया इस अवसर पर ब्राह्मण पारा वार्ड से गौरी शर्मा गार्गी शर्मा अन्नू साहू नीलू तिवारी नेहा दुबे ममता नम्रता प्रगति पवार विजया पवार उपस्थित रही ।


