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सफलता की कहानी:आजीविका डबरी ने जगाई नई उम्मीद, मछली पालन से समृद्धि की ओर बढ़ रहा जगदेव का परिवार

मेहनत, योजना और उपलब्ध संसाधन के बेहतर उपयोग से आत्मनिर्भरता की राह पर ग्राम पंचायत केकराखोली का परिवार

धमतरी- ग्रामीण परिवार के लिए जब कोई संसाधन केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका का आधार बनने लगे, तो वह बदलाव जीवन में नई उम्मीद लेकर आता है। शासन की योजनाओं का उद्देश्य भी यही है कि जरूरतमंद परिवारों को ऐसे संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, जिनके माध्यम से वे अपनी मेहनत और क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से पहुंचाने और हितग्राहियों को उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में जिले में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत केकराखोली निवासी श्री जगदेव पिता श्री मंगलू राम की कहानी योजना से मिले संसाधन को आजीविका के अवसर में बदलने की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत करती है।

योजना से मिला संसाधन, भविष्य के लिए तैयार हुआ आजीविका का आधार

जगदेव का परिवार लंबे समय से ग्रामीण परिवेश में उपलब्ध सीमित संसाधनों के सहारे खेती-किसानी एवं अन्य छोटे-मोटे कार्यों से अपनी आजीविका चलाता रहा है। परिवार की आय मुख्यतः दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में खर्च हो जाती थी। ऐसे में अतिरिक्त एवं अपेक्षाकृत स्थायी आय के साधन की आवश्यकता महसूस होती रही।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष 2026 में वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत जगदेव के लिए आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया। योजना से निर्मित डबरी ने उनके परिवार को एक ऐसा जल संसाधन उपलब्ध कराया, जिसका उपयोग अब आजीविका के नए अवसर के रूप में किया जा रहा है।

आज यह डबरी पानी से भरी हुई है। जल की उपलब्धता को देखते हुए जगदेव ने इसमें मछली पालन को आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इस प्रकार योजना के माध्यम से निर्मित परिसंपत्ति अब केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं रहकर परिवार के लिए संभावित आय का आधार बन रही है।

डबरी में दिख रहा है आत्मनिर्भर भविष्य का सपना

जगदेव बताते हैं कि पहले उनके पास ऐसा कोई स्वयं का संसाधन नहीं था, जिसका उपयोग वे अतिरिक्त आमदनी के लिए कर सकें। डबरी निर्माण के बाद उन्हें अपने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला है।

वे कहते हैं, हमारे लिए यह डबरी सिर्फ पानी जमा करने का साधन नहीं है। यह हमारे परिवार के लिए रोजगार और आमदनी का नया रास्ता है। डबरी में पानी देखकर हमें खुशी होती है। अब हम इसमें मछली पालन को आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि आने वाले समय में परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिल सके।

उनका मानना है कि किसी भी योजना का लाभ तभी सार्थक होता है, जब हितग्राही स्वयं मेहनत, लगन और जिम्मेदारी के साथ उपलब्ध संसाधन का उपयोग करे। इसी सोच के साथ वे डबरी के रखरखाव और प्रस्तावित मछली पालन गतिविधि को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

परिवार की भागीदारी से मजबूत होगी आजीविका

जगदेव के परिवार के अन्य सदस्य भी इस पहल को लेकर उत्साहित हैं। परिवार की योजना है कि मछली पालन की गतिविधियों में घर के सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करें। इससे न केवल परिवार की सामूहिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि उपलब्ध संसाधन का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।

मछली पालन से भविष्य में होने वाली संभावित आय का उपयोग परिवार की दैनिक आवश्यकताओं के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, कृषि कार्यों और अन्य जरूरी खर्चों में करने की उनकी योजना है। साथ ही, आय में वृद्धि होने पर परिवार भविष्य के लिए बचत करने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है।

सेवा संकल्प से योजनाओं का लाभ, हितग्राही की मेहनत से परिणाम

जगदेव की कहानी यह दर्शाती है कि शासन की योजनाओं से निर्मित परिसंपत्तियां तब अधिक प्रभावी बनती हैं, जब उनका उपयोग स्थानीय परिस्थितियों और परिवार की जरूरतों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाए। सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य भी शासन की योजनाओं और सेवाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।

आजीविका डबरी के माध्यम से जगदेव को उपलब्ध हुआ संसाधन अब उनके परिवार में आत्मनिर्भरता की उम्मीद जगा रहा है। यह कहानी बताती है कि एक परिसंपत्ति, सही योजना और निरंतर मेहनत मिलकर ग्रामीण परिवार के लिए आर्थिक अवसर का आधार बन सकती है।

आज पानी से भरी अपनी डबरी को देखकर जगदेव के सामने सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाले बेहतर कल की तस्वीर है। मछली पालन के माध्यम से आय बढ़ाने का उनका प्रयास अभी अपनी शुरुआत में है, लेकिन इस पहल ने परिवार को अपने संसाधनों के बल पर आगे बढ़ने का भरोसा जरूर दिया है।

जगदेव के लिए यह डबरी अब केवल मिट्टी और पानी से बनी संरचना नहीं, बल्कि मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते परिवार की उम्मीद, अवसर और नए संकल्प का प्रतीक बन चुकी है।

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