किसानों को आपसी विवाद में उलझा कर धान बेचने से वंचित करने का प्रयास न करें सरकार – लेखराम साहू

धमतरी। कुरुद के पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय समन्वयक पिछड़ा वर्ग कांग्रेस नई दिल्ली और वरिष्ठ किसान नेता लेखराम साहू ने कहा कि किसानों को आपसी विवाद में उलझा कर धान बेचने से वंचित करने का प्रयास भाजपा की साय सरकार द्वारा किया जा रहा है । लेखराम साहू कहा कि सरकार के नए प्रयोगों से किसानों का भारी नुकसान होने वाला है और हजारों किसान धान विक्रय से वंचित हो सकते हैं क्योंकि सरकार ने फसल प्रविष्टि को पटवारी आईडी से हटा दिया है और अब कृषि विभाग के माध्यम से डिजिटल क्रॉप सर्वे और पीवी एफ के माध्यम से फसल सत्यापन कराया जा रहा है इन दोनों ही व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां हैं जो प्राइवेट सर्वेयरों को दिया गया है उसमें मौके और मैप के बीच 9 से 10 मीटर तक का अंतर है जिससे गलत खेत में गलत फसल की प्रविष्टि होने की पूरी संभावना है एक बार गलत प्रविष्टि हो गई तो वह स्थाई रूप से दर्ज हो जाएगी और भविष्य में भूमि विवाद का बड़ा कारण बनेगी उन्होंने कहा कि गांव के केवल 50 से 60 प्रतिशत खसरे ही डिजिटल क्रॉफ्ट सर्वे के लिए उपलब्ध कराए गए हैं कई गांवों के तो एक भी खसरे उपलब्ध नहीं है जिन खसरों के उपलब्धता नहीं है वहां फसल प्रविष्टी ही नहीं होगी और बिना फसल प्रविष्टि के किसान अपना धान नहीं भेज पायेगा जो खसरे डीसीएस से छूट गए हैं उनके लिए पीवी एफ लाया गया है जिसमें हर खेत के चार कोनों का फोटो और जिओ लोकेशन दर्ज करना अनिवार्य किया गया है बिना किसान की उपस्थिति और बिना सीमा मिलान के यह तय करना असंभव है कि कौन सा खेत किसका है जिओ लोकेशन से खेत को स्थाई रूप से सिंचित कर दिया जाएगा बाद में यही आपसी बंटवारा मेड़ विवाद या कब्जे की स्थिति बनी तो किसान कहां जाएगेंं। लेख राम साहू ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में बिना जमीन मिलान के एक ही स्थान पर बैठकर सभी खसरों का पीवी कराने का दबाव बना रही है यह सीधे तौर पर किसानों की भूमि के साथ खिलवाड़ है।

