नियमानुसार पदोन्नति का लाभ देने पटवारियों ने की मांग, मंत्री टंकराम वर्मा को लिखा पत्र

धमतरी। शनिवार को पीडब्ल्यूडी रेस्टहाऊस पहुंचे धमतरी तहसील के पटवारी वासुदेव भोई, प्रकाश साहू, छबिलाल धृतलहरे, सीताराम सिन्हा, दीपक नेताम, वेदप्रकाश साहू सहित अन्य पटवारियों ने बताया कि पदोन्नति को लेकर पटवारियों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। वर्ष 1995 में पटवारियों को पदोन्नति दी गई थी, इसके बाद वर्ष 2016, 2017 व 2018 में परीक्षा भी आयोजित की गई। पदोन्नति को केवल प्रतियोगी परीक्षा बना दिया गया है, पिछले पांच वर्षों में एक भी पटवारी की पदोन्नति नहीं हुई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने पटवारियों को पदोन्नति देने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया है। समस्त विभागों में पदोन्नति एवं पहचान के लिये वरिष्ठता का मापदंड अपनाया जाता है, लेकिन पटवारियों के लिये ऐसा नहीं है। 10 से 30 वर्ष तक सेवाकाल के पटवारियों की पहचान वरिष्ठता के आधार पर होती है, लेकिन उनकी पदोन्नति के लिये कोई नियम नहीं है। पहले पटवारी को वरिष्ठता क्रम में राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति मिलता था, लेकिन अब पटवारियों को वरिष्ठता के विपरीत कनिष्ठ पटवारियों राजस्व निरीक्षक बनाने राजस्व विभाग द्वारा नियम में परिवर्तन कर दिया गया है। ऐसे में पटवारी वर्षों तक कार्य करते करते पटवारी पद पर ही सेवानिवृत्त होने को मजबूर होंगे। पटवारियों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि कर्मचारियों के लिये कहा जाता है कि पदोन्नति उसका विशेषाधिकार है, अगर विशेषाधिकार है तो पटवारियों को समय पर पदोन्नति क्यों नहीं दी जा रही है। पिछले पांच वर्षों में शासन के समस्त विभागों में भृत्य से लेकर अधिकारी स्तर के सभी का निर्बाध रुप से पदोन्नति हुआ है, लेकिन इन पांच वर्षो में प्रदेश के एक भी पटवारी को पदोन्नति नहीं दिया गया है। शासन-प्रशासन के महत्वपूर्ण कड़ी होने के बाद भी पटवारियों के साथ इस तरह का भेदभाव किया जा रहा है। पटवारी संघ ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग एवं जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा के नाम पत्र प्रेषित कर मांग किया है कि पटवारियों को पदोन्नति देने में किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाये और न ही पदोन्नति के लिये परीक्षा का आयोजन किया जाये, बल्कि सामान्य प्रशिक्षण प्रदान करते हुए वरिष्ठता क्रम में पदोन्नति प्रदान कर शासन के अनावश्यक खर्च को बचाया जाये।
