नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरो में उमड़ी भक्तो की भीड़
शाम को शुभ मुहूर्त में होगा ज्योत प्रज्वलित

धमतरी। चैत्र नवरात्र पर्व का आज से शुभारंभ हुआ। आज प्रथम दिन देवी मंदिरो में सुबह से भक्तो की भड़ी उमड़ी। नगर की आराध्य देवी मां विंध्यवासिनी मंदिर, रिसाईपारा के दंतेश्वरी मंदिर, रामसागरपारा के रिसाई माता मंदिर, दानीटोला के शीतला मंदिर, ब्राम्हणपारा के बम्बलई मंदिर, शिव चौक के दुर्गा मंदिर, गंगरेल के अंगारमोती मंदिर, नयाबस स्टैंड के काली मंदिर, विवेकानंद वार्ड के कालिका मंदिर, हटकेशर के कामना मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरो में भक्तो का तांता लगना शुरु हो गया। वही इन मंदिरो में शुभ मुहूर्त में मनोकामना ज्योत प्रज्जवलित किये जाएंगे. इस तरह नवरात्र पर्व के चलते जसगीत, जगराता, भजन संध्या सहित अन्य विविध कार्यक्रम भी आयोजित होंगे. उल्लेखनीय है कि चैत्र नवरात्र पर्व के साथ ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसलिए आज सुबह से ही मंदिरो में भक्तों की आस्था का सैलाब उमडऩे लगा। क्षेत्र की ख्याति प्राप्त मंदिरो में भक्तों द्वारा मनोकामना दीप प्रज्वलित करने पंजीयन कराया गया है।
35 साल बाद बदला मां विंध्यवासिनी मंदिर का स्वरुप
मां विंध्यवासिनी मंदिर का राजस्थान एवं यूपी के कारीगरों द्वारा विशेष पत्थर से गर्भगृह के बाहर दो सिंह व विष्णु के दशावतार सहित अन्य निर्माण किये जाने से मंदिर का स्वरुप ही 35 साल बाद बदल गया है। जो कि भक्तों में आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। नवरात्र पर आज से मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटेगी। मंदिर में विराजित मॉ विंध्यवासिनी की प्रतिमा के मुकुट एवं कलश तथा छत्र को स्वर्ण जडि़त किया गया है। इसके बाद राजस्थान के कारीगरों द्वारा मकराना मार्बल से गलीचा, इनलेवर्क की गई। खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के कलाकारों द्वारा मयूरल आर्ट से विष्णु के दशावतार का निर्माण किया गया। जयपुर के कारीगरों द्वारा गर्भगृह के बाहर संगमरमर पत्थर से अदभूत कलाकारी के साथ दो सिंह बनाया गया है। फरीदाबाद उत्तर प्रदेश से लाये गये जगमग झूमर, स्वर्ण शुभ, लाभ एवं स्वास्तिक सहित दीवारों पर की गई अदभूत पेटिंग तथा आकर्षक लाइटों ने मंदिर का स्वरुप ही बदल दिया है। जो कि भक्तों में आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।