एक एकड़, एक साल, एक लाख : जिले में औषधीय पौधों की खेती की प्रक्रिया शुरू
80 एकड़ शासकीय भूमि पर औषधीय पौधों की खेती के लिए स्वसहायता समूहों से अनुबंध
खेती शुरू करने चार लाख रूपये की प्रारंभिक राशि भी मिली
कलेक्टर बोले-ऐतिहासिक दिन, इससे किसानों-महिलाओं की आय बढ़ेगी

धमतरी। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की पहल पर धमतरी जिले में औषधीय पौधों की खेती की प्रक्रिया शुरू हो गई। अगले एक सप्ताह में 21 गांवों में 80 एकड़ शासकीय भूमि पर लगभग 38 स्व सहायता समूहों की महिलाएं खस, ब्राम्ही और पचौली के पौधे रोपेंगी। किसानों सहितं महिला स्व सहायता समूहों की सदस्यों की आय बढ़ाने में औषधीय पौधों की खेती विशेष पहल की शुरूआत मानी जा रही है। औषधीय पौधों की खेती से विशेषज्ञों ने एक एकड़ रकबे में एक साल में 75 हजार रूपये से लेकर एक लाख रूपये तक के शुद्ध मुनाफे का अनुमान लगाया है। जिले में इस खेती के लिए औषधीय पादप बोर्ड की सहायता ली जा रही है। बोर्ड के सीईओ जेसीएस राव ने आज कुरूद में एक सौ से अधिक महिलाओं को औषधीय पौधों की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इसके लिए अनुदान, प्रशिक्षण, पौधे आदि की उपलब्धता के बारे में भी बताया। जिले में कुरूद और मगरलोड विकासखण्ड में पहले चरण में खस 68 एकड़ रकबे में, ब्राम्ही 9 एकड़ रकबे में और पचौली 3 एकड़ रकबे में लगाई जाएगी। 21 ग्राम पंचायतों के 21 गांवों के 38 स्व सहायता समूहों की लगभग 380 महिलाएं यह खेती करेंगे। जिले में पहले चरण में औषधीय पौधों की खेती शासकीय भूमि पर कराई जा रही है। इसके अनुभव के बाद निजी किसानों के खेतों में भी औषधीय फसलें लगवाई जाएंगी। पहले चरण में नारी, गुदगुदा, परखंदा, परसवानी, मंदरौद, सिरसिदा, बोरसी, लड़ेर, सोनेवारा, कपालफोड़ी, मेघा, गिरौद, सौंगा, बुड़ेनी, कण्डेल, बलियारा, झूरानवागांव, सारंगपुरी, देवपुर, सोरम और पोटियाडीह में महिला स्व सहायता समूह खस, ब्राम्ही और पचौली की खेती करेंगी। अगले एक सप्ताह में इन सभी गांवों में चिन्हांकित स्थलों पर पौधों का रोपण शुरू हो जाएगा। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने आज के दिन को धमतरी जिले के लिए ऐतिहासिक बताया उन्होंने कहा कि महिला समूहों को औषधीय पौधों की खेती से जोडऩे के सफल प्रयास से एक तरफ इस खेती को बढ़ावा तो मिलेगा ही, इसके साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों को भी गति मिलेगी। औषधीय पौधों की खेती को लेकर महिला स्वसहायता समूहों की सदस्यों में भारी उत्साह देखा गया। आज की कार्यशाला में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। औषधीय पौधों की खेती के तरीकों की पूरी जांच पड़ताल की। महिलाओं ने विशेषज्ञों से औषधीय पौधों की खेती के बारे में शंका-समाधान भी किया।
