सिंगपुर वन परिक्षेत्र में मिले बाघ के पगचिन्ह, वन विभाग अलर्ट, गांव में कराई गई मुनादी
पूर्व में उदंती, सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगे ट्रैप कैमरे में कैद हो चुकी है टाइगर की तस्वीर

धमतरी। जिले में लगातार टाइगर के मौजूदगी के निशान मिल रहे है। जिसके चलते वन विभाग अलर्ट मोड पर है। साथ ही लोगो को भी सावधानी बरतने की निर्देश दिए जा रहे है। उदंती, सीतानदी टाइगर रिजर्व के बाद अब धमतरी वन मंडल के जंगल में टाइगर के मौजूदगी के सबूत मिले है। बता दे कि पूर्व में मई माह के अंतिम सप्ताह में उदंती, सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र बाघ की फोटो जंगल में लगाए गए ट्रैप कैमरे में कैद हुई थी। इसके पूर्व बाघ के मौजूदगी के कयास लगते रहते थे। लेकिन कैमरे में तस्वीर कैद होने के बाद टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि हो गई। अब सिंगपुर वन परिक्षेत्र में टाइगर के पग चिन्ह मिले है। जिससे वन विभाग अलर्ट मोड पर है। आसपास के ग्रामीणों को जंगल न जाने की हिदायत दी जा रही है। साथ ही टाइगर से होने वाले जनहानि के खतरे को देखते हुए सावधानी बरतने मुनादी कराई जा रही है। जिला उत्तर सिंगापुर वन क्षेत्र के बाघ के ताजा चिन्ह मिले हैं। बता दे कि टाइगर की निगरानी के लिए 150 नए कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से एक में टाइगर की तस्वीर पूर्व में कैद हो चुकी है।
20 साल बाद दिखा टाइगर
ज्ञात हो कि जिले में लगभग 20 सालों बाद टाइगर नजर आया है। पूर्व में 2008-09 में गरियाबंद जिले के उदंती और धमतरी जिले के सीतानदी अभयारण्य को मिलाकर भारत सरकार ने उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का गठन किया था। धमतरी जिले के सीतानदी रेंज में वर्ष-2005 में बाघ को अंतिम बार देखा गया था। इस दौरान हुए गणना में 5 बाघों की पुष्टि हुई थी। फिलहाल बाघ की उपस्थिति के प्रत्यक्ष प्रमाण मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी सतत निगरानी कर रहे हैं। कैमरा लगाने से लेकर बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
टाइगर तलाश रहे अनुकुल रहवास

बता दे कि पूर्व में यह टाइगर उड़ीसा बार्डर में था। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत कुल्हाड़ी घाट गरियाबंद में दूसरी बार टाइगर ट्रैक हुआ। इसके बाद अरसीकन्हार रेंज में पगचिन्ह मिले। अब सिंगपुर वन परिक्षेत्र में टाइगर के पग चिन्ह मिले है। इससे स्पष्ट है कि टाइगर लगातार विचरण कर रहा है। जानकारो की माने तो संभवत: टाइगर शिकार व पानी की उचित उपलब्धता वाला रहवास तलाश रहा है।