एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल से चरमराई सरकारी स्वास्थ्य सेवायें
कई जांच बंद, मरीजों को मजबूरी में जाना पड़ रहा निजी अस्पताल
जिला अस्पताल, सामुदायिक, प्राथमिक, उप स्वास्थ्य केन्द्रो में मरीजों की बढ़ी परेशानी

धमतरी। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केन्द्र के माध्यम से सरकार द्वारा गरीबों व मध्यम वर्गीय लोगों को नि:शुल्क व बेहतर उपचार की सुविधा प्रदान करते है। लेकिन एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों को सरकारी उपचार हेतु भटकना पड़ रहा है। कई सुविधा जांच, काउंसलिंग बंद है। जिससे मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि विगत 18 अगस्त से एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल प्रारंभ हुई है जो कि आज तक जारी है। इस प्रकार 28 दिनों से जारी हड़ताल के कारण शासकीय स्वास्थ्य सेवायें बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिला अस्पताल में रोजाना 500 से 600 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें कई गंभीर मरीज भी पहुंचते है। कर्मचारियों के हड़ताल से दवा वितरण जांच आदि सुविधायें प्रभावित है। नशामुक्ति केन्द्र, मनोरोग विभाग, आडियोमेट्री लैब में जांच, आईपीडी, ओपीडी, एनसीडी क्लीनिक, हमर लैब, स्पर्श क्लीनिक, एसएनसीयू वार्ड, आईसीयू वार्ड, एनआरसी वार्ड सहित अन्य वार्डो के कार्य प्रभावित हो रहे है। नर्सिंग छात्रों की मद्द ली जा रही है। इससे कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
डाक्टरों की कमी भी खल रही है
जिला अस्पताल में धमतरी सहित आसपास के कई जिलों यहां तक के बस्तर क्षेत्र के मरीज भी बेहतर उपचार की उम्मीद से पहुंचते है। लेकिन जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी खल रही है। एक के बाद एक कई डाक्टर अस्पताल छोड चुके है। या फिर रिटायर हो चुके है। इससे उपचार जांच सुविधा के साथ ही आपरेशन भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में मरीजों को मजबूरीवश निजी अस्पतालो में मंहगी फीस अदा कर जांच, उपचार कराना पड़ रहा है।
”एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल से शासकीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित तो हुई है, लेकिन जिले में कही भी तालाबंदी की नौबत नहीं है। रेगुलर कर्मचारियों के साथ ही नर्सिंग छात्र-छात्राओं की मद्द ली जा रही है। ÓÓ
यूएल कौशिक
मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी
जिला धमतरी

