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औद्योगिक विकास की ओर सशक्त कदम : धमतरी बन रहा निवेश और रोजगार का नया केंद्र

धमतरी-धमतरी जिला आज केवल कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में ही नहीं, बल्कि औद्योगिक संभावनाओं से भरपूर उभरते जिले के रूप में भी अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। जिले की आंतरिक क्षमताओं, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और नवाचार आधारित तकनीकी तालमेल के प्रभावी अभिशरण से यहां निवेश और रोजगार के नए अवसर निरंतर सृजित हो रहे हैं। यह प्रयास न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, बल्कि युवाओं को अपने ही जिले में आजीविका के बेहतर अवसर भी प्रदान कर रहा है।
धमतरी जिले की रीढ़ कही जाने वाली कृषि, विशेषकर धान उत्पादन, औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बनी हुई है। जिले में वर्तमान में लगभग 230 राइस मिलें संचालित हैं, जिनके माध्यम से धान का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन किया जा रहा है। इससे एक ओर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर लगभग 3000 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। यह कृषि आधारित उद्योगों की सफलता का सशक्त उदाहरण है।
इसके साथ ही धमतरी अंचल वनोपज के क्षेत्र में भी विशिष्ट पहचान रखता है। स्थानीय वनोपज के साथ-साथ बस्तर क्षेत्र से प्राप्त वनोपज उत्पादों का भी जिले में प्रसंस्करण किया जा रहा है। वर्तमान में वनोपज आधारित 12 इकाइयाँ स्थापित हैं, जो न केवल स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी साधन भी उपलब्ध करा रही हैं। लाख प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से जिले से निर्यात होना, धमतरी की औद्योगिक क्षमता को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित करता है।
इन व्यापक संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए बीते दो वर्षों में औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। कुरूद विकासखंड के भालुझूलन (11.00 हेक्टेयर) एवं मगरलोड विकासखंड के करेलीबड़ी (14.00 हेक्टेयर) में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना हेतु भूमि का आधिपत्य 20 मार्च 2025 को सीएसआईडीसी, रायपुर को सौंपा गया। इन औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण हेतु 14 जनवरी 2026 को वर्क ऑर्डर जारी किया जाना, जिले की औद्योगिक दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इसी कड़ी में ग्राम श्यामतराई में 8.83 हेक्टेयर भूमि पर 464 लाख रुपये की लागत से लघु वनोपज प्रसंस्करण औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई है। यहां भू-आबंटन की प्रक्रिया में 18 आवेदन प्राप्त होना और 9 इकाइयों को भूमि आबंटित किया जाना, निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। वहीं ग्राम छाती में 16.00 हेक्टेयर भूमि पर लैंड बैंक की स्थापना हेतु 30 दिसंबर 2025 को भूमि का आधिपत्य सीएसआईडीसी को सौंपा गया, जिससे भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए ठोस आधार तैयार हुआ है।
इसके अतिरिक्त ग्राम जी-जामगांव में 600 लाख रुपये की लागत से विकसित नवीन औद्योगिक क्षेत्र में भी निवेशकों की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिल रही है। यहां भू-आबंटन की बिडिंग प्रक्रिया में 36 आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा 12 इकाइयों को भूमि का आबंटन किया जा चुका है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा बताया कि धमतरी जिले में औद्योगिक विकास को लेकर राज्य शासन और जिला प्रशासन का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि स्थानीय संसाधनों, कृषि एवं वनोपज आधारित उद्योगों के साथ आधुनिक तकनीक और निवेश को जोड़ते हुए संतुलित एवं टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जाए। बीते वर्षों में जिले में औद्योगिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, भूमि बैंक की स्थापना तथा निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के ठोस प्रयास किए गए हैं। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि धमतरी आज निवेशकों के विश्वास का केंद्र बन रहा है और स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। आने वाले समय में प्रशासन उद्योग, रोजगार और नवाचार के माध्यम से धमतरी को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध जिला बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहेगा।
समग्र रूप से देखा जाए तो धमतरी जिला आज नियोजित औद्योगिक विकास, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और प्रशासनिक प्रतिबद्धता के चलते निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह विकास न केवल आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि आने वाले समय में धमतरी को रोजगार, नवाचार और आत्मनिर्भरता का मजबूत मॉडल भी बनाएगा।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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