Uncategorized

शहर में बढ़ती जा रही भिखारियों की संख्या, कुछ सच में लाचार तो कुछ ने बनाया पेशा

बस स्टैण्ड, मंदिर सहित विभिन्न मौको पर ज्यादा रहती है भिखारियों की संख्या

छोटे छोटे बच्चों से मंगाया जा रहा भीख, तंदरुस्त, जवान महिला पुरुष भी मांग रहे भीख

धमतरी। शहर में साल दर साल भिखारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले लाचार अपाहिज और बुजुर्ग असक्षम लोग ही मजबूरीवश भीख मांगकर जीवन यापन करते थे। लेकिन कई सालों से कुछ विशेष जाति के लोगों द्वारा भीख मांगने को बकायदा पेशा बनाया है। दुर्भाग्य है कि इस कार्य में मासूम छोटे छोटे बच्चों को भी लगाया गया है।
बता दे कि शहर में लगातार भिखारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ विशेष स्थानो पर तो भिखारियों से लोग परेशान हो जाते है। नये बस स्टैण्ड में यदि 5 से 10 मिनट रुक जाये तो तो कई भिखारी आपके पीछे लग जायेंगे। इनमें कई मासूम छोटे बच्चें होते है। जिन्हें अच्छे बुरे की समझ नहीं होती है। वहीं कई तंदरुस्त जवान महिलायें पुरुष भी होते है इसी प्रकार शहर के कई मंदिरो के बाहर भी भिखारियों की संख्या बढ़ी है। इन मंदिरों में विशेष दिन पर भीख मांगने वालों की संख्या ज्यादा होती है। कई तीज त्यौहारो विशेष दिवस पर आयोजत होने वाले कार्यक्रमों स्थलों के बाहर भी भिखारियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। लाचार असक्षम लोगो को दान देना गलत नहीं है। लेकिन इनके आड़ में कुछ लोगों द्वारा इसे धंधा ही बना लिया गया है।
भीख मांगने की प्रवृत्ति कारण नहीं जुड़ पा रहे है समाज की मुख्य धारा व शिक्षा से
कुछ विशेष लोग ऐसे है जिन्होने भीख मांगने को रोजी रोटी और पैसे कमाने का जरिया बना लिया है। यह सालों से यही काम कर रहे है। दो-ढाई साल के बच्चों से भी भीख मंगवाते है। बच्चो को स्कूल भेजना इन्हें पसंद नहीं है। ये अब तक समाज की मुख्य धारा से भी नहीं जुड़ पाये है। ऐसा नहीं है कि शासन द्वारा ऐसे लोगों के लिये कोई योजनाएं नहीं है। लेकिन ये स्वयं अपनी सोच और स्थिति सुधारने नहीं चाहते इसलिए भीख मांगना ही इन्हेंं सबसे अच्छा और आसान लगता है।
भिखारियो से बड़ी परेशानी
बस स्टैण्ड सहित अन्य क्षेत्रो में भिखारी लोगों के पीछे ही पड़ जाते है। इससे यात्री तो परेशान होते है यहां दुकान, पहुंचने वाले ग्राहक भी भिखारियों से बचने जल्दी निकलना बेहतर समझते है। इससे व्यापार भी प्रभावित होता है। ज्यादातर लोग छोटे बच्चों पर तरस खाकर पैसे दे देते है। इनसे भीख इनके माता-पिता परिवार द्वारा मंगाया जाता है। क्योंकि इन्हें आसानी से भीख मिल जाता है। इसलिए कई दुकानदार बच्चों को पैसो के स्थान पर खाने पीने सामान देनेे की भी अपील करते है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!