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132 उपवास के महान तपस्वी, परम पूज्य वीरभद्र मुनि जी म.सा. के धमतरी की ओर बढ़ रहे कदम

महान तपस्वी संत के आगमन को श्रद्धालुओं में उमंग उत्साह का माहौल

132 उपवास के महान तपस्वी, परम पूज्य वीरभद्र मुनि जी महाराज सा. का आज पावन पद विहार लखनपुरी के समीप संपन्न हुआ। गुरुदेव निरंतर तप, त्याग, संयम और साधना के कठिन मार्ग पर अग्रसर रहते हुए धर्म प्रभावना का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
कठोर तपस्या, अदम्य आत्मबल और अनुकरणीय संयम के प्रतीक पूज्य गुरुदेव का यह विहार श्रद्धालुओं के लिए आस्था, प्रेरणा और ऊर्जा का केंद्र बन गया है। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद गुरुदेव का विहार लगातार जारी है, जो सभी के लिए आश्चर्य और श्रद्धा का विषय बना हुआ है।132 उपवास जैसी अत्यंत कठिन तप साधना करते हुए भी गुरुदेव के मुखमंडल पर अद्भुत तेज, शांति और दिव्यता स्पष्ट दिखाई देती है। तपस्या के इस दुर्लभ स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं। गुरुदेव का जीवन संदेश देता है कि आत्मबल, संयम और संकल्प शक्ति से हर कठिनाई को सहज बनाया जा सकता है।जैसे-जैसे पूज्य गुरुदेव के चरण धमतरी नगरी की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे जिले के जैन समाज सहित समस्त श्रद्धालुओं में उत्साह, उमंग और आनंद का वातावरण बनता जा रहा है। नगर में गुरुदेव के मंगल प्रवेश को लेकर विशेष तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं.श्रद्धालुजन अपने आपको सौभाग्यशाली मानते हुए गुरुदेव के दर्शन, प्रवचन और आशीर्वाद की प्रतीक्षा कर रहे हैं।धर्म प्रेमियों का कहना है कि ऐसे महान तपस्वी संतों का नगर में आगमन किसी बड़े पुण्य का परिणाम होता है। संतों के चरण जहां पड़ते हैं, वहां धर्म, शांति और सद्भावना का वातावरण निर्मित होता है। पूज्य वीरभद्र मुनि जी महाराज सा. का धमतरी आगमन संपूर्ण क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का अवसर बनेगा।
श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरुदेव का जीवन वर्तमान युग में संयम, सेवा और साधना का जीवंत उदाहरण है। उनकी कठिन तपस्या समाज को आत्मचिंतन, सदाचार और धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

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