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योगेश फाउंडेशन के तत्वाधान में संस्कारों का पतन,नारी उत्थान,सुंदर काण्ड सहित गौ सम्मान आव्हान अभियान संकल्प कार्यक्रम सम्पन्न

संस्कारों का पतन ही राष्ट्र की मृत्यु है _अंकिता मिश्रा


धमतरी। जिस दिन संस्कारों की जड़े सुख जाएंगी,उस दिन समाज तो बचेगा,पर धर्म नही बचेगा।संस्कार ही भारत की आत्मा है और आत्मा की पतन ही राष्ट्र की मृत्यु है,उक्त बातें योगेश फाउंडेशन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की मातृशक्तियों की आहुत बैठक में श्रीमती अंकिता रत्नेश मिश्रा ने कही उक्त बैठक में संस्कारों का पतन और नारी उत्थान के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि,कभी यह वही भारत था जहां द्रोपती के वस्त्रहरण पर सभ्यता का शीश झुक गया था, और एक स्त्री की लज्जा भंग करने की कोशिश ने महाभारत जैसी भीषण महायुद्ध गाथा को जन्म दिया था।इसी कड़ी में समाज सेविका श्रीमती बासन यादव ने कहा कि आज यह वही भारत है जहां स्त्रियाँ स्वयं अपनी लज्जा का वस्त्र फैशन और आधुनिकता के नाम पर उतार रही है, और समाज उसे ग्लैमर कह कर ताली बजा रहा है। प्रसिद्ध रामायणी श्रीमती रमा दीवान ने कहा कि यह भी देश है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने स्त्री के सम्मान के लिये राज _सिंहासन का त्याग किया था,पर आज उसी राम के देश में मर्यादा एक मीम बनकर रह गई है।टीकाकार श्रीमती लक्ष्मी सोनी ने कहा कि जहां पण्डित किसी स्त्री को तिलक लगाने से भी हिचकते थे, वहां अब विवाह जैसे पवित्र अवसरों पर साड़ी पहनाने, ब्लाउज़ फिट करने,मेकप करने और टैटू बनाने तक के कार्य पुरुष कर रहे हैं।कुशल गृहिणी श्रीमती रत्नावली मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि,दुख इस बात का नहीं की यह सब हो रहा है, बल्कि इस बात का है कि समाज ईसे प्रगति समझ कर गर्व महसूस कर रहा है।कभी मां – बहनों के चरण धोकर पुत्र देवता बनते थे,अब वहीं पुत्र जीम और सैलून में खड़े होकर अर्धनग्न महिलाओं की देह छूने को प्रोफेशन मानते है।वह भी उन्हीं परिवारों से निकलते है जहां संस्कारों की बात करने पर कहा जाता है कि अरे,अब जमाना बदल गया है।पर सच यह है कि जमाना नहीं बदला -जमीर मर गया है।धर्म के क्षेत्र में कार्य करने वाली बहन श्रीमती बबली सोनी ने आगे कहा कि जिस समाज में लज्जा मनोरंंजन बन जाए, वहां देह संस्कृति से ऊपर चली जाए, जहां स्त्रीत्व का गौरव बाजार में बिके,वहां सभ्यता का सूर्य अस्त हो जाता है। यंहा पूजन अब देह का हो रहा है,देवी त्व का नहीं।बैठक में उपस्थित मातृशक्तियों सम्बोधित करते हुए श्रीमती हेमलता शर्मा ने कहा कि,मनुष्य तब नहीं मरता जब उसकी सांस रुकती है,वह तब मरता है जब उसकी शर्म,संकोच और संस्कार मर जाते है।इसी कड़ी में श्रीमती हीरा राजपूत ने आगे कहा कि आज हमारे घरों में माता – पिता धर्म ग्रन्थ नहीं रिल्स और रैम्प वॉक देखकर अपने बच्चों को आधुनिकता सीखा रहे हैं इसी कड़ी में श्रीमती भारती पाण्डे,श्रीमती रेणुका मिश्रा,श्रीमती कोशल मिश्रा,श्रीमती कविता पांडे एवं श्रीमती सीता निषाद ने संयुक्त रूप से कहा कि,संस्कारों के पतन का कारण और उसके उपचार के लिए सकारात्मक चिन्तन के साथ मातृशक्तियों को आगे रखकर सब मिलकर दृढ़ ईच्छा शक्ति के साथ समाधान और उपचार करेंगे तभी परिवर्तन और परिणाम अवश्य मिलने लगेंगे। योगेश फाउंडेशन के तत्वाधान में पुरुषोत्तम मास की अन्तिम दिवस की समाप्ति और सोमवती अमावस को ध्यान में रखते हुए रिसाई पारा पूर्व, रामसागर पारा,बनिया पारा,पोस्ट ऑफिस वार्ड एवं मराठा पारा के महिला रामायणी प्रमुखों द्वारा भगवान श्री राम के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर,विधि – विधान से मंत्रों चार द्वारा पूजा, अर्चना कर रामायण की चौपाई,का अर्थ बताते हुए सुंदर कांड का पाठ किया गया। कार्यक्रम के अंत में नगर एवं पूरे देश में एक साथ सामूहिक रूप से चलाए जा रहे गो सम्मान आव्हान,अभियान के तहत् भारत में गो हत्या पर पूर्णत: प्रतिबन्ध लगे,गौ हत्या पूर्णत: समाप्त हो।गो माता को राष्ट्र माता, राष्ट्र देव, राष्ट्र आराध्य, राष्ट्र धरोहर के संरक्षण में सामूहिक संकल्प लिया गया।उक्त अवसर पर मुख्य रूप से श्रीमती रत्नावली मिश्रा,श्रीमती हेमलता शर्मा,श्रीमती हीरा राजपूत,श्रीमती रमा दीवान,श्रीमती बासन यादव,श्रीमती भारती पाण्डे,श्रीमती लक्ष्मी सोनी,श्रीमती रेणु मिश्रा,श्रीमती मीरा रजक,श्रीमती कविता पांडे,श्रीमती बबली सोनी,श्रीमती कोशल मिश्रा,श्रीमती अंकिता रत्नेश मिश्रा,श्रीमती सीता निषाद,श्रीमती ऊषा थवाईत,कुमारी सुरेखा राजपूत, एवं कुमारी नेहा रजक उपस्थित रहे।

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