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तीन महीनों से जिले में शराब की कमी : किल्लत ने बढ़ाई शराब के शौैकिनों की परेशानी

देशी के साथ ही अंग्रेजी व बीयर के कई ब्रांड की है कमी, महीनों बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

मनपसंद शराब खरीदने शराबियों को लगानी पड़ते है कई दुकानो के चक्कर

धमतरी। धमतरी जिले सहित पूरे प्रेदश में शराब की किल्लत से शराब के शौकिन परेशान है। महीनों बीत जाने के बाद भी शराब की कमी की समस्या दूर नहीं हो पाई है। ऐसे में शराबियों द्वारा इसे भी साय सरकार की बड़ी नाकामी बताई जा रही है।
1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में नये वित्तीय वर्ष की शुरुवात हुई, लेकिन इसके लगभग महीने भर पहले से ही धमतरी सहित पूरे प्रदेश में शराब की कमी शुरु हो गई। जो बढ़ते गई और अब लगभग तीन महीने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है। शराबियों द्वारा रोजाना शराब दुकानों के चक्कर अपनी पसंदीता ब्रांड के लिए लगाया जाता है। इसके बाद भी कई बार उन्हें शराब नहीं मिल पाती है। इससे परेशान होकर शराबियों द्वारा साय सरकार को जमकर कोसा जाता है। बता दे कि धमतरी जिले में सबसे ज्यादा देशी शराब प्लेन और मशाला की बिक्री होती है। इसके पश्चात इंग्लिश ब्रांड जो कि 150 रुपये क्वार्टर से प्रारंभ होती है और कई मंहगा ब्रांड हजारों तक मिलती है। धमतरी व प्रदेश में बीयर के भी बड़ी संख्या में शौकीन है। बीयर व इंग्लिश शराब के कई नामी ब्रांड्स जो सबसे ज्यादा खपत में होती है वह भी शराब दुकानों में उपलब्ध नहीं रहता। कई बार शराबियों द्वारा आये दिन नये-नये इंग्लिश ब्रांड की शराब दुकानों में मिलती है जबकि जो ब्रांड की डिमांड की जाती है। सेल्समेन द्वारा उसकी अनुपलब्धा बताई जाती है। इससे कई बार शराब दुकानों विवाद की स्थिति भी बनती है।
कोचियों और ढाबो में उपलब्ध हो जाता है शराब दुकानों से ज्यादा ब्रांड
नाम न छापने के शर्त पर कई शराबियों ने बताया कि शराब तो सरकार द्वारा सप्लाई होती है ऐसे में सरकार की शराब दुकानों में हमेशा ब्रांड और स्टॉक की कमी रहती है लेकिन इसके विपरीत अवैध शराब विक्रेताओं और कई ढाबो में हमेशा शराब, बीयर के ज्यादातर डिमांडिंग ब्रांड और स्टॉक उपलब्ध रहते है। ऐसे में शराबियों ने शराब के कारोबार में मिली भगत का आरोप लगाया है। शराबियों ने कहा कि शराब दुकान से डेढ़ गुणा या उससे भी अधिक दाम पर अवैध विक्रेताओ द्वारा शराब बेचा जाता है इसमें मिली भगत करने वालों का भी हिस्सा हो सकता है ?
पैकेजिंग पॉलिसी में बदलाव, सप्लाई चेन में रुकावट सहित हो सकते है कई कारण
छत्तीसगढ़ की सरकारी शराब दुकानों में पिछले काफी समय से पसंदीदा ब्रांड्स और क्वार्टर की भारी किल्लत चल रही है। आबकारी विभाग और गोदामों से शराब दुकानों तक मांग के अनुरूप नया स्टॉक नहीं पहुंच पा रहा है। दुकानों पर केवल सीमित या पुराने बचे हुए स्टॉक की ही बिक्री हो रही है। बताया जा रहा कि हाल ही में आई नई पैकेजिंग गाइडलाइंस और प्लास्टिक बोतलों के इस्तेमाल के फैसलों के कारण, विशेषकर सस्ती और मध्यम रेंज की शराब की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई काफी धीमी हो गई है।
एमपी और उड़ीसा के माल की भी होती है बिक्री
बता दे कि जिले में आये दिन पुलिस व आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन लोग इसे खानापूर्ति ही मानते है क्योंकि इसके बाद भी अवैध शराब बिक्री पर कमी नहीं आ रही है। यहां तक शराबियों ने आरोप भी लगाया है कि जिले में मध्यप्रदेश और उड़ीसा की शराब की बड़ी मात्रा में खपत होती है। इससे शराब की क्वालिटी में भी संदेह लोगो को रहता है। साथ ही इस प्रकार अन्य प्रदेश की शराब अवैध रुप से बिकने से शासन को राजस्व क्षति भी होती है।

”जिले में खपत के अनुसार पर्याप्त सप्लाई नहीं होने से देशी शराब की थोड़ी किल्लत बनी हुई है। वहीं अंग्रेजी शराब व बीयर दुकानों में उपलब्ध है। ÓÓ
निरुपमा लोन्हारे
आबकारी अधिकारी
जिला-धमतरी

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