आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव के चालीहा पर्व के 10 वें दिन के कार्यक्रम का आयोजन

धमतरी। आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव के चालीहा पर्व के 10 वें दिन के कार्यक्रम का आयोजन गुरुभक्त प्रहलाद आहूजा नीरज आहूजा के परिवार के द्वारा कराया गया जिसमें सत्संग के दौरान संत जी के द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया जो आचार्य प्रवर के द्वारा राग भैरवी में रचित है एवं प्रेम प्रकाश ग्रन्थ साहब के पृष्ठ 98 पर शोभायमान है. बताया गया कि आचार्य प्रवर ने इस भजन के माध्यम से हमें समय के महत्व को समझने की शिक्षा देते हुए समझाया है कि मनुष्य जन्म का जो हमें अवसर मिला है उसका लाभ लो इसे तत्काल अर्थात अभी से राम भजन में लगाए अगर अभी यौवन अवस्था में भजन नहीं करोगे तो वृद्धा अवस्था में भजन करना बड़ा ही कठिन एवं दूभर हो जायेगा क्योंकि वृद्धावस्था में आपके सभी अंग कमजोर हो जायेंगे कान सत्संग सुन नहीं सकेंगे आँखे दृष्टि कमजोर होने के कारण मंदिर में विराजमान प्रभु का सद्गुरु महाराज के विग्रहों के दर्शन नहीं कर पायेंगे पैर भी कमजोर हो जायेंगे जिससे तीर्थ करना तो दूर मंदिर तक भी जा नहीं पाओगे शरीर कमजोर हो जायेगा जिसके कारण पदमासन में बैठ नाम सिमरन नहीं कर पाओगे मुख से प्रभु के गुणवाद नहीं कर पाओगे स्मरण शक्ति भी क्षीण हो जाएगी भगवान का नाम कहाँ याद आएगा इसलिए अभी इसी समय इसी पल से अपने चित को राम भजन में लगा लो गुरु महाराज जी ने आगे लिखा है कि प्रभु की बनाई इस सृष्टि में सभी कार्य अवसर पर ही होते हैं वृक्ष भी समय पर फल देते हैं सूर्य चाँद भी समय पर उदय होते हैं समय पर अस्त होते हैं इसी प्रकार आप भी इस शुभ अवसर मनुष्य तन में वह भी अभी युवावस्था में ही गोविन्द के गुण गाओ भूत एवं भविष्य की व्यर्थ की बातों की चिंता को छोड़ वर्तमान में अभी से ही राग द्वेष रहित पावन कर्म करने में लग जाओ अंतिम पंक्ति में गुरु महाराज जी आगाह करते हुए कह रहे हैं कि आप यदि अपना हित चाहते हो तो समय का कदर करो बड़े ही भाग्य से ये अवसर मिला है फिर मिले न मिले इसे भजन कर सफल कर ले.


