प. पू. रत्ननिधि श्री जी म.सा. आदि ठाणा-4 का धमतरी में मंगल प्रवेश, दो दिवसीय धार्मिक आयोजनों में उमड़ेगा श्रद्धा का सागर
चातुर्मास का समय आत्मशुद्धि, तप, त्याग और धर्म आराधना का सर्वोत्तम अवसर होता है -प. पू. रत्ननिधि श्री जी म.सा.

धमतरी। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ एवं श्री चातुर्मास व्यवस्था समिति, धमतरी के तत्वावधान में नगर का वातावरण धार्मिक हो रहा है। कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया परम पूज्य निपुणा श्री जी म.सा. की सुशिष्या, संघ स्नेह वारिधि प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी म.सा. की सुशिष्या परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. आदि ठाणा-4 का आज श्री नेमीचंद धनपतलाल बरडिय़ा के निवास नेमीधन, शांति कॉलोनी धमतरी में मंगल प्रवेश होगा। इस पावन अवसर पर आज एवं 21 जुलाई को श्रद्धालुओं के लिए विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रात: 9 बजे से 10 बजे तक प्रवचन, दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक स्वाध्याय तथा संध्या 7:45 बजे से केवल महिलाओं के लिए विशेष धर्म चर्चा आयोजित की जा रही है।
प्रवचन में परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. ने कहा कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे जीवन में अपनाना ही सच्ची साधना है। मन, वचन और कर्म की पवित्रता, संयम, क्षमा, दया, सेवा तथा आत्मचिंतन ही आत्मकल्याण का वास्तविक मार्ग है। संसार के भौतिक सुख क्षणिक हैं, जबकि धर्म से प्राप्त आत्मिक शांति और संतोष स्थायी होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का त्याग कर सत्य, अहिंसा और सदाचार का पालन करना चाहिए। नियमित स्वाध्याय, प्रभु भक्ति और गुरु वचनों का अनुसरण जीवन को सफल, सार्थक एवं आनंदमय बनाता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय आत्मशुद्धि, तप, त्याग और धर्म आराधना का सर्वोत्तम अवसर होता है। इस पावन काल में अधिक से अधिक धर्म श्रवण, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण तथा सेवा कार्यों में भाग लेकर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरना चाहिए।
