विज्ञान सुविधा देता है, लेकिन धर्म जीवन को सही दिशा देता है – पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा.
चातुर्मास के प्रवचन में विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर दिया गया प्रेरक संदेश

धमतरी। धर्मनगरी धमतरी के इतवारी बाजार स्थित श्री पाश्र्वनाथ जिनालय में परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-4 के सान्निध्य में चातुर्मास के आज के प्रवचन का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। प्रवचन में पूज्य रत्ननिधि श्री जी म.सा. ने कहा कि विज्ञान ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं। आज मनुष्य कुछ ही क्षणों में दुनिया के किसी भी कोने से जुड़ सकता है, चिकित्सा, शिक्षा, संचार और तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। विज्ञान मानव जीवन को सरल बनाता है, लेकिन धर्म जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने कहा कि यदि विज्ञान के साथ संस्कार और विवेक नहीं होगा तो वही विज्ञान विनाश का कारण भी बन सकता है। इसलिए विज्ञान और अध्यात्म का संतुलन आवश्यक है। विज्ञान हमें बाहरी संसार का ज्ञान देता है, जबकि धर्म हमें अपने भीतर झांकना सिखाता है। विज्ञान बुद्धि को विकसित करता है और धर्म चरित्र का निर्माण करता है। पूज्यश्री ने कहा कि आज मोबाइल, इंटरनेट और आधुनिक तकनीक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन उनका उपयोग संयम और सदुपयोग की भावना से होना चाहिए। तकनीक का उपयोग ज्ञान, सेवा और समाजहित के लिए हो, न कि समय की बर्बादी, गलत आदतों या मानसिक अशांति के लिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वैज्ञानिक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रयोग करता है, उसी प्रकार धर्म भी आत्मचिंतन और आत्मअनुभूति का मार्ग है। जब मनुष्य अपने विचारों, वाणी और कर्मों का प्रतिदिन परीक्षण करता है, तभी उसका वास्तविक विकास होता है। उन्होंने समाजजनों से आह्वान किया कि आधुनिकता को अपनाएं, लेकिन अपनी संस्कृति, संस्कार और धर्म को कभी न छोड़ें। नई पीढ़ी को विज्ञान की शिक्षा के साथ नैतिक एवं धार्मिक शिक्षा भी देना आवश्यक है।