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भव्य महानदी गंगा आरती से मिली नई आध्यात्मिक पहचान, महानदी के तट पर आस्था का महाकुंभ, विकास की नई इबारत लिखेगा रुद्रेश्वर धाम

20 करोड़ की समग्र विकास परियोजना से धमतरी बनेगा धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र


धमतरी। सावन माह के प्रथम सोमवार को रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के समक्ष पहली बार चित्रोत्पला महानदी के पावन तट पर बनारस की तर्ज पर भव्य महानदी गंगा आरती का आयोजन हुआ। अब सावन के प्रत्येक सोमवार को महानदी गंगा आरती होगी । धमतरी युवा ब्रिगेड एवं श्री रुद्रेश्वर महादेव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अलौकिक आयोजन ने केवल एक धार्मिक परंपरा की शुरुआत नहीं की, बल्कि धमतरी की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को भी नई दिशा प्रदान की। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, 108 दीपों से सजी महाआरती, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच महानदी का तट दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। दीपों की स्वर्णिम छटा और महानदी की शांत लहरों ने ऐसा अद्भुत वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित श्रद्धालुओं को काशी के घाटों का सजीव अनुभव हुआ। महाआरती से पूर्व विद्याकुंज स्कूल के विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम, भगवान शिव एवं भगवान जगन्नाथ की स्तुति में मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इसके पश्चात रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती सम्पन्न हुई तथा वैदिक रीति से चित्रोत्पला महानदी की गंगा आरती संपन्न कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की मंगलकामना की गई। आरती के उपरांत श्रद्धालुओं पर पवित्र जल का छिड़काव तथा महाप्रसादी का वितरण किया गया। इस अवसर पर धमतरी विधायक ओंकार साहू, महापौर जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने महानदी की अविरल धारा, प्रकृति संरक्षण तथा सामाजिक सद्भाव की कामना करते हुए इस आयोजन को जनआस्था का ऐतिहासिक पर्व बताया।
20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार
यह आयोजन ऐसे समय हुआ है जब राज्य शासन द्वारा रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के समग्र विकास की लगभग 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की गई है। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के माध्यम से प्रस्तावित इस परियोजना के अंतर्गत मंदिर परिसर का विकास धार्मिक गरिमा, सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के संतुलित समन्वय के साथ किया जाएगा। तीन चरणों में विकसित होने वाली इस योजना में पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए मुख्य प्रवेश द्वार, शिखर, दीप स्तंभ, नंदी प्रतिमा, तोरण, सौंदर्यीकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। परिसर में चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम स्थल, प्रसाद एवं स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, डिजिटल सूचना प्रणाली, स्वास्थ्य केंद्र, एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क, स्वच्छ शौचालय, दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएँ, सुरक्षित घाट, रेलिंगयुक्त विसर्जन कुंड तथा बैठने की समुचित व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज तथा भविष्य की मेरीन ड्राइव जैसी अवधारणाएँ रुद्रेश्वर धाम को धार्मिक पर्यटन के एक आधुनिक केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, हरित क्षेत्र विस्तार एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएँ भी इस परियोजना का हिस्सा होंगी।

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