सिंधी समाज द्वारा शीतला सप्तमी पर आज मनाया गया थदड़ी पर्व
एक दिन पूर्व बने खाने को ठंडा भोजन के पूर्व में किया गया ग्रहण, मां शीतला की हुई पूजा अर्चना

धमतरी। सिंधियो का त्यौहार थदड़ी बडी ही मनाया जाता है। थदड़ी समाज का एक ऐसा त्यौहार है जो लोग अपने घरों में धूमधाम से मनाते हैं समाज के संतो ने बताया कि यह एक ऐसा ज्वार है जिसे ठंडा करना आवश्यक है और यह छोटे बड़ों दोनों को ही आता है और तब सिंधी समाज के लोगों ने इस बीमारी को शांत करने का उपाय पूछा तो संत ने बताया की ठंडा खाना आप बनाइएगा थदड़ी का मतलब होता है ठंडा खाना खाना आप अपने घर में एक दिन पहले ठंडा खाना बनाइएगा दिन में मीठी रोटी टिक्की बेसन की रोटी दही बड़े और जितने भी चीज बनाना है वह एक दिन पहले बनाइएगा और दूसरे दिन माता शीतला का शीतला देवी का पूजा अर्चना कीजिएगा और उसे दिन घर में चूल्हा नहीं जला चाहिए सारे लोग सुबह और शाम ठंडा ही भोजन करेंगे इससे शीतला देवी माता अपना गुस्सा शांत करेगी और यह जो चिकन पॉप और माता यह भी शांत हो जाएगी उसी दिन से सिंधी समाज में थदड़ी मनाना शुरू किया और आज तक मनाया जाता है आज सिंधी समाज का आदरणीय त्यौहार है कल सभी लोगों ने अपने घर में ठंडा बनाए हैं और आज सभी लोग शीतला माता की पूजा अर्चना करने के पश्चात उसे ग्रहण किया है और शाम तक घर में चूल्हा नहीं जलाए हैं सब लोग अपने घर में इस दिन बहुत ही फ्री रहते हैं तो कोई ना कोई कार्यक्रम मनोरंजन अपने घर में करते हैं और एक दूसरे को थदड़ी का प्रसाद भी भेजते हैं। इस अवसर पर सिंध शक्ति महिला संगठन की अध्यक्ष सुश्री पार्वती वाधवानी ने बताया कि यह शीतला सप्तमी का त्यौहार मनाया जाता है आज का दिन सिंधी परंपरा और आस्था से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर सिंध शक्ति महिला संगठन की सचिव साक्षी वाधवानी ने बताया कि सिंधी समाज में विधि पूर्वक थदड़ी पर्व पीढिय़ों से मनाया जा रहा है।
