मंत्रों में नवकार मंत्र और सूत्रों में कल्पसूत्र है सर्वश्रेष्ठ – परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी

धमतरी। परम पूज्य प्रवर्तनी महोदया कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 4 का धर्मनगरी धमतरी के श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार में चातुर्मास हेतु विराजित है। परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने आज के प्रवचन के माध्यम से पर्वधिराज पर्युषण पर्व हमारे लिए अनमोल पर्व है। यह पर्व हमारी आत्मा के परिवर्तन के लिए आया है। मंत्रों में नवकार मंत्र और सूत्रों में कल्पसूत्र को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। पर्व पर्यूषण के तीसरे दिन से कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ किया जाता है। इसी नियमानुसार आज हम भी कल्पसूत्र का प्रारंभ कर रहे है। इस कल्पसूत्र में तीन अधिकार है पहला जिन चरित्र, दूसरा स्थविरावली और तीसरा साधु समाचारी है। पहले अधिकार में तीर्थंकरों का जीवन चरित्र दूसरे अधिकार में गौतम स्वामी, सुधर्मा स्वामी जैसे भव्य आत्माओं का जीवन चरित्र है। तीसरे अधिकार में साधु साध्वियों का आचार बताया गया है।
कल्पसूत्र में 4 तीर्थंकर परमात्मा का जीवन चरित्र बताया गया है
पहले तीर्थंकर आदिनाथ भगवान के जीवन से हमे समझना चाहिए कि किस तरह अनजाने में भी किए गए कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। 22वें तीर्थंकर परमात्मा नेमिनाथ के जीवन से हमे राग का त्याग किया तरह किया जा सकता हैऔर जीवन में करुणा किस तरह होना चाहिए। यह सीखना चाहिए। 23वें तीर्थंकर परमात्मा पाश्र्वनाथ भगवान के जीवन से हमे बैर भाव से किस तरह कर्मों का बंध होता है और किस तरह उस कर्म से छुटकारा मिलता है यह समझने का प्रयास करना चाहिए। 24वें तीर्थंकर परमात्मा महावीर स्वामी के जीवन जी और जीने दो का पाठ सीखने को मिलता है। इनके जीवन से हमे संसार के सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव समझने को मिलता है। जैन दर्शन के अनुसार 24 तीर्थंकरों में से वर्तमान में 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का शासन चल रहा है। इसलिए भी इनका जीवन चरित्र श्रावण करना चाहिए। इससे साधु साध्वी, श्रावक श्राविकाओं के आचार आदि कैसा होना चाहिए, इसकी जानकारी मिलती है। परमात्मा महावीर की आयु 24 तीर्थंकरों में सबसे कम थी लेकिन सबसे अधिक कष्ट आपने सहन किया। आगे बताया गया कि पहले और 24वें तीर्थंकरों के साधुओं का आचार एक जैसा होता है। शेष 22 तीर्थंकर के साधुओं का आचार एक जैसा होता है। पहले और चौबीसवें तीर्थंकर के साधुओं को पाप लगे या न लगे प्रतिक्रमण अनिवार्य है। जबकि शेष 22 तीर्थंकर के साधुओं के लिए पाप लगने पर प्रतिक्रमण आवश्यक है। आज दूसरे दादा मणिधारी श्री जिनचंद्र सूरी जी की स्वर्गारोहण जयंती है।