भक्ति और उल्लास के बीच हुआ झूलेलाल चालीसा महोत्सव का समापन
बहिराणा साहिब की शोभायात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
सिंधी सहित सर्व समाज ने की सुख-समृद्धि की कामना

धमतरी। कोष्टापारा स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में सिंधी समाज द्वारा आयोजित श्री झूलेलाल चालीसा महोत्सव का 17 सितंबर को विधिवत समापन हुआ। 40वें अंतिम दिन सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। विशेष पूजन-पाठ, आरती, पल्लव एवं अरदास के साथ दिनभर धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। चालीसा महोत्सव के अंतिम दिन सिंधी समाज सहित सर्व समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और अपने इष्टदेव श्री झूलेलाल जी के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। सुबह मंदिर में विशेष महाआरती का आयोजन हुआ। इसके बाद समाजजनों द्वारा इष्टदेव श्री झूलेलाल जी को विशेष भोग अर्पित किया गया। आरती, पल्लव एवं अरदास के साथ चालीसा पर्व के अंतिम दिन की धार्मिक शुरुआत हुई। इसके बाद झूलेलाल ग्राउंड सभा हॉल में अमरावती, महाराष्ट्र से पहुंचे संत डॉ. संतोष कुमार जी ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर किया। दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक आयोजित प्रवचन में सिंधी समाज के साथ सर्व समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। संत के भक्ति एवं आध्यात्मिक प्रवचन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। इस अवसर पर सिंधी पंचायत, झूलेलाल मंडल परिवार एवं समाज के सम्माननीयजनों द्वारा अमरावती से पहुंचे संत डॉ. संतोष कुमार जी सहित समाज के संतों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान झूलेलाल आश्रम एवं ग्राउंड परिसर में गंगवानी परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए लंगर-प्रसादी की व्यवस्था की गई,जिसमें सिंधी समाज के साथ सर्व समाज के लोगों ने प्रसादी ग्रहण की।
बहिराणा साहिब की निकली भव्य शोभायात्रा
शाम 5 बजे झूलेलाल मंदिर में पुन: विशेष पूजन-पाठ, आरती, पल्लव एवं अरदास के बाद बहिराणा साहिब की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। 40 दिनों से मंदिर में प्रज्वलित अखंड ज्योत तथा बहिराणा साहिब को विशेष रथ में इष्टदेव श्री झूलेलाल जी की प्रतिमा के साथ विराजमान किया गया। विशेष रथ में अखंड ज्योत, बहिराणा साहिब एवं इष्टदेव की प्रतिमा के दर्शन के लिए पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शोभायात्रा के दौरान सिंधी समाज सहित सर्व समाज के लोगों ने माथा टेककर देश, प्रदेश एवं धमतरी जिले की जनता की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। श्रद्धालुओं को प्रसादी भी वितरित की गई। राजिम से पहुंचे मंडल परिवार के चलित गायन एवं धार्मिक भजनों के बीच समाज के लोग पदयात्रा करते हुए भक्ति में झूमते और नाचते-गाते नजर आए। शोभायात्रा में पुरुषों, महिलाओं, बच्चों एवं समाज के हर वर्ग की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।
