मोदी सरकार का डिजिटल विश्वासघात: यूपीआई पर एमडीआर शुल्क जनता की जेब पर खुला डाका :- योगेश शर्मा

मोदी सरकार द्वारा आगामी 15 अक्टूबर से डिजिटल भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का फैसला पूरी तरह से जन-विरोधी और आम नागरिकों के साथ किया गया एक बड़ा विश्वासघात है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष योगेश शर्मा ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की इस दमनकारी नीति की कड़े शब्दों में निंदा की है।योगेश शर्मा ने कहा कि पहले तो मोदी सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ का ढोल पीटकर देश की भोली-भाली जनता को नकद छोड़ ऑनलाइन और यूपीआई भुगतान की लत लगाई। जब देश का हर छोटा-बड़ा नागरिक, मजदूर और मध्यवर्गीय परिवार इस व्यवस्था का आदी हो गया, तो अब सरकार ने अपना असली रंग दिखाते हुए इस पर टैक्स का हंटर चला दिया है। यह नीति आम जनता के भरोसे की पीठ में छुरा घोंपने जैसी है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के भ्रामक दावों की पोल खोलते हुए सीधे आंकड़े जनता के सामने रखे। उन्होंने बताया कि सरकार यह कहकर गुमराह कर रही है कि यह शुल्क केवल 2000 रुपये से ऊपर के चुनिंदा भुगतानों पर लगेगा और इससे आम उपभोक्ता प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन हकीकत यह है कि देश में होने वाले कुल 314 लाख करोड़ रुपये के यूपीआई ट्रांजैक्शन में से 207 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ऊपर के मूल्य के हैं। सरकार आंकड़ों से खेलकर एक बार फिर देश की जनता के साथ क्रूर जुमलेबाजी कर रही है। योगेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाला 0.4 प्रतिशत का यह एम डी आर शुल्क न केवल छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए बड़ी आफत बनेगा, बल्कि अंततः इसका पूरा बोझ आम उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ेगा। सरकार चाहे कितनी भी मॉनिटरिंग का दावा कर ले, कोई भी व्यापारी अपनी जेब से यह घाटा नहीं सहेगा। अंत में वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ाकर यह पैसा आम आदमी की जेब से ही वसूला जाएगा। आज के इस भीषण महंगाई के दौर में, जब रसोई गैस से लेकर दाल-तेल तक के दाम आसमान छू रहे हैं, सरकार का यह कदम आम नागरिकों की जेब पर सरेआम डाका डालने जैसा है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष योगेश शर्मा ने आगे कहा कि मोदी सरकार चंद बड़े वित्तीय घरानों और बैंकों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की जनता को लूट रही है। डिजिटल क्रांति के नाम पर शुरू हुआ यह सफर अब ‘टैक्स वसूली’ का जरिया बन चुका है। कांग्रेस पार्टी लगातर व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए इस जन-विरोधी फैसले के खिलाफ मुखरता से लड़ाई लड़ रहीं है ताकी सरकार को यह तानाशाही फैसला वापस लेने पर मजबूर किया जा सके।