जेल से अस्पताल ले जाते समय अब नहीं होगी सुरक्षा में लापरवाही:कैदी की हर गतिविधि होगी बॉडी वॉर्न कैमरे में रिकॉर्ड, सहायक जेल अधीक्षक या वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य
जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निर्देश पर कैदियों को उपचार एवं अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए जेल से बाहर ले जाने के संबंध में लागू की गई है यह व्यवस्था

रायपुर। जेल में बंद कैदियों को उपचार सहित अन्य चिकित्सकीय जरूरतों के लिए जेल से बाहर अस्पताल ले जाने की व्यवस्था को और अधिक सख्त किया गया है। अब कैदी को जेल से बाहर अस्पताल ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के साथ उसकी पूरी गतिविधि रिकॉर्ड करने के लिए ड्यूटी पर तैनात जेल स्टाफ को बॉडी वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही अस्पताल ले जाने वाली टीम में सहायक जेल अधीक्षक अथवा उनसे वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत कैदी के जेल से बाहर निकलने से लेकर अस्पताल पहुंचने, उपचार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और उपचार पूरा होने के बाद वापस जेल लाए जाने तक की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। बॉडी वॉर्न कैमरे के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग होने से ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने में भी मदद मिलेगी।
अधिकारी की मौजूदगी भी जरूरी
निर्देशों के मुताबिक कैदी को अस्पताल ले जाते समय केवल सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर्याप्त नहीं होगी। उसके साथ सहायक जेल अधीक्षक या उससे वरिष्ठ स्तर के अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य की गई है। संबंधित अधिकारी कैदी के जेल से निकलने से लेकर अस्पताल तक पहुंचने और उपचार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे। उपचार पूरा होने के बाद कैदी को वापस जेल पहुंचाने तक अधिकारी की निगरानी बनी रहेगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगी सीधी नजर
जेल से बाहर इलाज के लिए जाने वाले कैदियों की सुरक्षा को लेकर यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कैदी की आवाजाही के दौरान सुरक्षा में किसी तरह की चूक न हो, इसके लिए अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। बॉडी वॉर्न कैमरे की रिकॉर्डिंग से पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी घटना या विवाद की स्थिति में तथ्यों की जांच में सहायता मिल सकेगी।
जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निर्देश पर कैदियों को उपचार एवं अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए जेल से बाहर ले जाने के संबंध में यह व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य कैदियों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ जेल से बाहर उनकी आवाजाही के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।