निदान-03’ शिविर से दिव्यांगजनों और वरिष्ठजनों के जीवन को मिली नई राह, 1,600 से ज़्यादा हितग्राही हुए लाभान्वित
कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र सहित विभिन्न सहायक उपकरणों से आसान होगा दैनिक जीवन, आत्मविश्वास और स्वावलंबन को मिलेगा बढ़ावा

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा बोले— “हर दिव्यांगजन सम्मान के साथ जीवन जिए, आत्मनिर्भर बने और अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़े, यही हमारा संकल्प है”
धमतरी, 11 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने, उनके दैनिक जीवन को सुगम करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग तथा भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठजनों को आवश्यकतानुसार सहायक उपकरण, चिकित्सकीय परीक्षण तथा विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ प्रदान किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में कुल 1,630 दिव्यांगजन एवं वरिष्ठजन लाभान्वित हुए।
शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी), बस पास एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के माध्यम से हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। शिविर की विशेषता यह रही कि जरूरतमंदों को अनेक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हुईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिली।
सहायक उपकरणों से आसान होगा जीवन, बढ़ेगा आत्मविश्वास
किसी दिव्यांगजन के लिए अपने पैरों पर चल पाना, बिना सहारे दैनिक कार्य करना, दूसरों की बातें सुन पाना या सहजता से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच पाना केवल सुविधा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है। ‘निदान-03’ शिविर इसी संवेदनशील सोच के साथ आयोजित किया गया, ताकि जरूरतमंदों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप सहायता मिल सके।
कृत्रिम अंगों और कैलिपर्स से चलने-फिरने में कठिनाई का सामना कर रहे हितग्राहियों को सहारा मिलेगा। ट्राइसाइकिल एवं व्हीलचेयर से आवागमन सुगम होगा, जबकि श्रवण यंत्र से सुनने में कठिनाई का सामना कर रहे लोगों को संवाद और सामाजिक सहभागिता में मदद मिलेगी। इसी तरह वॉकिंग स्टिक, बैसाखी, वॉकर और स्मार्ट केन जैसे उपकरण दैनिक गतिविधियों को अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने में सहायक होंगे।
वरिष्ठजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण, आंखों की जांच, चश्मे तथा आवश्यकता के अनुसार श्रवण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि हितग्राहियों के जीवन में सुविधा, भरोसा और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा करना है।
नगरी में पहले दिन 172 दिव्यांगजन हुए लाभान्वित
शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में जिला स्तरीय शिविर आयोजित किया गया। इसमें 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, 13 व्हीलचेयर, 27 श्रवण यंत्र, तीन बैसाखी, दो एल्बो क्रच, सात वॉकिंग स्टिक और एक वॉकर प्रदान किया गया। इसके अलावा नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक मापन एवं प्रक्रिया पूरी की गई। शिविर में 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए गए तथा 44 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड की सुविधा प्रदान की गई।
धमतरी में दूसरे दिन 460 दिव्यांगजन पहुंचे
10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में आयोजित शिविर के दूसरे दिन 460 दिव्यांगजन पहुंचे। इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न सहायक उपकरणों एवं सुविधाओं से लाभान्वित किया गया। आठ दिव्यांगजनों के बस पास बनाए गए, 16 दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा 51 हितग्राहियों को एम-आधार कार्ड की सुविधा प्रदान की गई।
सहायक उपकरणों के वितरण के अंतर्गत 15 कृत्रिम पैर, सात कृत्रिम हाथ, नौ कैलिपर्स, 116 श्रवण यंत्र, 43 ट्राइसाइकिल, 49 व्हीलचेयर, छह बैसाखी, चार एल्बो क्रच, 30 वॉकिंग स्टिक, चार स्मार्ट केन और एक वॉकर प्रदान किया गया। इन उपकरणों से हितग्राहियों को आवागमन, दैनिक कार्यों और सामाजिक गतिविधियों में अधिक सुविधा मिलेगी।
समापन दिवस पर भी जारी रहीं सेवाएं
11 अक्टूबर को शिविर के अंतिम दिन भी 1121 दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठजनों के पंजीयन, स्वास्थ्य परीक्षण, सहायक उपकरणों के वितरण तथा विभिन्न शासकीय सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया जारी रही। शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी दी। जनसंपर्क विभाग द्वारा छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई, जिसके माध्यम से शासन की विकासपरक गतिविधियों और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रदर्शित किया गया। साथ ही विभाग की मासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ जनमन’ का निःशुल्क वितरण भी किया गया।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा— प्रत्येक हितग्राही के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हमारा लक्ष्य
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर, सशक्त और सम्मानपूर्ण जीवन जीने के अवसर प्रदान करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। ‘निदान-03’ जैसे शिविरों का उद्देश्य केवल सुविधाएं वितरित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक हितग्राही की जरूरत को समझना और उसके जीवन को पहले से अधिक सुगम बनाना है।
उन्होंने कहा, “जब कोई दिव्यांगजन सहायक उपकरण के माध्यम से अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम होता है, जब कोई व्यक्ति कृत्रिम अंगों के सहारे अपने कदम आगे बढ़ाता है या श्रवण यंत्र की मदद से अपने परिजनों की बातें सुन पाता है, तब उसके साथ पूरे परिवार के जीवन में भी उम्मीद और खुशी का संचार होता है। हमारे लिए यह केवल एक उपकरण का वितरण नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की ओर आगे बढ़ाने का प्रयास है। हर दिव्यांगजन को सम्मान के साथ जीवन जीने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज में बराबरी के साथ भागीदारी करने का अवसर मिलना चाहिए। जिला प्रशासन इसी भावना के साथ निरंतर कार्य कर रहा है।”
कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठजनों को सुविधाओं के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने की पहल की गई है। उन्होंने शिविर में लगाए गए विभागीय स्टॉलों तथा जनसंपर्क विभाग की छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया और योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी विभागों, भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति, चिकित्सकीय दल एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सेवा, संवेदना और स्वावलंबन का सार्थक प्रयास
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर प्रशासनिक सेवा को संवेदनशीलता और मानवीय सरोकारों से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। शिविर के माध्यम से दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठजनों को आवश्यक उपकरणों और सुविधाओं से जोड़ते हुए उनके जीवन को अधिक सहज, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने का प्रयास किया गया। यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि सही समय पर उचित सहायता मिलने से चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों के लिए आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खुल सकते हैं और वे समाज की मुख्यधारा में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
// पाराशर/:
