गंगरेल बांध के डूब प्रभावित परिवारों के भूमि आवंटन एवं पुनर्वास प्रकरणों की जांच जारी
पांच सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति करेगी पात्रता, भूमि की उपलब्धता एवं संबंधित अभिलेखों का परीक्षण
धमतरी- पंडित रविशंकर शुक्ल जलाशय परियोजना (गंगरेल बांध) के अंतर्गत डूब प्रभावित जोगीडीह ग्राम के परिवारों के भूमि आवंटन एवं पुनर्वास से संबंधित प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। प्रकरणों में उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, भूमि आवंटन संबंधी दस्तावेजों तथा न्यायालयीन आदेशों के आधार पर तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धमतरी ने बताया कि गंगरेल बांध परियोजना वर्ष 1972 से प्रारंभ हुई थी। इसके अंतर्गत धमतरी, बालोद एवं कांकेर जिलों के कुल 55 ग्राम प्रभावित हुए थे। जोगीडीह ग्राम के डूब प्रभावित परिवारों के भूमि आवंटन, पुनर्वास एवं संबंधित राजस्व अभिलेखों के संधारण से जुड़े प्रकरण विभिन्न समयावधियों में प्रस्तुत किए गए हैं। इन प्रकरणों के निराकरण के लिए अभिलेखों की वस्तुस्थिति और संबंधित दावों की नियमानुसार जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 16 दिसंबर 2020 को पारित आदेश तथा शासन स्तर से जारी निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में भूमि आवंटन की पात्रता, उपलब्ध भूमि की स्थिति, आवंटित भूमि की प्रकृति और संबंधित प्रकरणों की वैधानिक स्थिति का परीक्षण आवश्यक है।
इसी क्रम में कार्यालयीन आदेश क्रमांक 221/भू-अभि./रा.नि.-व-लो./2026, दिनांक 24 अगस्त 2026 के माध्यम से गंगरेल बांध जनकल्याण डूबा संघ संघर्ष समिति द्वारा भूमि आवंटन की मांग को लेकर प्रस्तुत आवेदनों की पात्रता एवं अपात्रता का परीक्षण करने के लिए अपर कलेक्टर, धमतरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति गठित की गई है।
समिति कर रही अभिलेखों एवं दावों का परीक्षण
वर्तमान में समिति द्वारा जांच की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जांच के अंतर्गत राजस्व अभिलेखों, पट्टा आवंटन एवं निरस्तीकरण से संबंधित दस्तावेजों, ग्राम के नक्शे, खसरा अभिलेखों, वन भूमि से संबंधित दस्तावेजों तथा न्यायालयीन आदेशों का परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही, संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी के आधार पर भूमि की उपलब्धता, पूर्व में किए गए आवंटन तथा संबंधित व्यक्तियों के दावों की जांच की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त अभिलेख एवं तथ्यात्मक जानकारी भी प्राप्त की जाएगी।
नियमों एवं न्यायालयीन आदेशों के अनुरूप होगी आगे की कार्यवाही
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने बताया कि जांच पूर्ण होने के बाद समिति अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करेगी। इसके पश्चात प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर प्रचलित नियमों, शासन के निर्देशों तथा माननीय न्यायालय के आदेशों के अनुरूप नियमानुसार एवं विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।
