महिलाओं ने निर्जला रखा करवाचौथ का उपवास, नहीं दिखा आसमान में चांद

धमतरी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 29 अक्टूबर को मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने बताया कि यह पर्व पति की लंबी आयु एवं सलामति के लिए की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाओं द्वारा सुबह उठ स्नान उपरांत व्रत रखने संकल्प लिया गया। पश्चात दोपहर में भजन कीर्तन का दौर चला। शाम को सोलह श्रृंगार कर भगवान गणेश, शंकर के अलावा माता पार्वती एवं माता करवा की पूजा की गई। ज्योतिषों की माने तो करवा चौथ पर इस बार परिध, मालव्य, राजयोग बुधादित्य राजयोग, शुक्रादिव्य राजयोग बना। जो कि बेहद मंगलकारी योग है। करवा चौथ में विशेष संयोग बनने से कई व्रत रखने वाली महिलाओं में दोगुना उत्साह देखने को मिला। वहीं बारिश एवं खराब मौसम के चलते बाजार फीका रहने से विक्रेताओं में मायूसी देखने को मिली। पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि करवा चौथ में चन्द्रदेव पूजन एवं दर्शन का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार चन्द्रमा को आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है। इसकी वजह से करवा चौथ में चंद्रमा की पूजन कर पति की लंबी आयु हेतु मंगल कामना की जाती है। साथ ही करवा चौथ में माता पार्वती व माता करवा, भगवान शिव, गणेश और कार्तिक की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। वहीं दूसरी ओर खराब मौसम एवं चक्रवात अर्नब के असर होने से चांद बादल में पूरी तरह से छिपा रहा। इससे करवा चौथ व्रत रखने वाली अधिकांश महिलाओं को चांद का दीदार नहीं होने से उनमें मायूसी देखने को मिली।
