पिछले वादों पर विचार नही, निराशाजनक रहा साय सरकार का बजट
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीशु चन्द्राकर, कांग्रेस नेता आंनद पवार, पूर्व दुग्ध महासंघ अध्यक्ष विपिन साहू ने बजट पर दी प्रतिक्रिया

धमतरी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीशु चन्द्राकर, कांग्रेस नेता आंनद पवार, पूर्व दुग्ध महासंघ अध्यक्ष विपिन साहू ने साय सरकार द्वारा प्रस्तुत दूसरे बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए निराशाजनक बताया है। नेताओं ने कहा कि इस बजट में पूर्व के वादों को भूला दिया गया है। भाजपा अपने घोषणा पत्र में किए वादों को लेकर इस बजट में भी कोई विचार नहीं कर पाई है। 2 साल के भीतर 1 लाख भर्ती की बात कही गई थी, बजट में ना ही 1 लाख नई सरकारी नौकरी का जिक्र, न अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का कोई रोड़मैप, न 500 में सिलेंडर याद रहा, न बेरोजग़ारी भत्ता और न ही छात्रों को बस का फ्री पास का जिक्र किया गया। नेताओं ने कहा कि वित्तमंत्री केवल तुकबंदी करते रहे, मोदी की पुरानी अधूरी गारंटियों पर मौन रहकर केवल झूठा यशोगान करते रहे, दूसरी सरकारों के कार्यों और योजनाओं का श्रेय खुद ही ले लिए। यह सरकार पूर्व में संचालित उद्योगों को भी संचालित करने में नाकाम रही है, अब नए उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर बढ़ाने का झूठा दावा कर रही है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीशु चन्द्राकर, कांग्रेस नेता आंनद पवार, पूर्व दुग्ध महासंघ अध्यक्ष विपिन साहू नें कहा कि यह सरकार नौकरी देने नहीं बल्कि रोजग़ार छीनने वाली सरकार है। छत्तीसगढ़ में विश्वविद्यालयों की संख्या 4 से 25 होने में इस सरकार का कोई योगदान नहीं है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में आठ नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले सारे सरकार के दूसरे बजट को मिलाकर कुनकुरी में केवल एक नए मेडिकल कॉलेज की घोषणा हुई है। धरातल पर शून्य है। पिछले साल 27000 करोड़ से अधिक का कर्ज लेने के बाद इस बजट में फिर से लगभग 20000 करोड़ के नए कर्ज का प्रावधान भाजपा सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और अनर्थशास्त्र का प्रमाण है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार में शिक्षा पर कुल बजट का 19.4 प्रतिशत खर्च किया गया था जो अब इस बजट में घटकर मात्र 12 रह गया है। कृषि के क्षेत्र में कुल बजट कांग्रेस के समय लगभग 17 प्रतिशत हुआ करता था, जो अब घटकर मात्र 10 प्रतिशत रह गया है। धान और किसान छत्तीसगढ़ की पहचान है लेकिन भाजपा की सरकार ने कृषि पर बजट आवंटन लगभग 6 प्रतिशत घटा दिया है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में 8 प्रतिशत की भारी भरकम कटौती भारतीय जनता पार्टी की बदनीयती, दुर्भावना और जन विरोधी नीतियों को प्रमाणित करता है।