जैसे आग में तपने से सोने का मैल मिट जाती है वैसे ही तप के ताप व तेज से मन के मैल मिट जाते हैं-स्वामी भगत प्रकाश
प्रेम प्रकाश आश्रम में हुआ सत्संग कीर्तन व चालीसा पाठ का आयोजन

धमतरी। तपोमूर्ति आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 139 वें जन्मोत्सव पर जारी चालीहा महोत्सव के तृतीय दिवस श्री प्रेम प्रकाश आश्रम धमतरी में सत्संग कीर्तन एवं चालीसा पाठ का आयोजन हुआ. कार्यक्रम का आयोजन गुरुभक्त नानकराम वाधवानी परिवार द्वारा अपनी माता कृष्णा देवी वाधवानी के प्रथम पुण्य तिथि पर कराया गया. सभी प्रेमियों के लिए आश्रम में भंडारे की व्यवस्था भी की गई थी। चालीहा महोत्सव के तृतीय दिवस के साथ साथ पावन अपरा एकादशी का भी शुभ दिन था सुबह परम पूज्य गुरुवर स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज जो सन्त मण्डली सहित विदेश यात्रा पर है उन्होंने मेलबोर्न ऑस्ट्रेलिया से गुरु भक्तों के उद्धार के लिए सन्देश भेजा कि आचार्य श्री तपोमूर्ति हैं जैसे आग में तपने से सोने की मैल मिट जाती है वैसे ही तप के ताप से तप के तेज से मन की मैल मिट जाती है आचार्य जी ने अपने गुरु स्वामी आसूराम जी महाराज से नाम लेकर तप किया एवं परम सुखधाम को प्राप्त किया वे तो स्वयं ईश्वर के अवतार थे फिर भी तपस्या करके ईश्वर से साक्षत्कार करके दिखाया उन्होंने शिष्यों को जिज्ञासुओं को परम सुखधाम कैसे प्राप्त किया जाता है मार्ग न केवल बताया बल्कि उस मार्ग पर चल के दिखाया.तपस्या से बारह वर्ष की अल्प आयु में ही इस मार्ग पर जाने हेतु अपनी माता से अनुमति देने के लिए कारण बताया कि है माता काल सिर पर बैठा है किस क्षण में ले जाए अत: मेरा मन संसार की किसी भी बात में नहीं लगता क्योंकि यह पानी के बुदबुदों जैसे क्षणिक हैं मेरे मन को राम के नाम में ही आनन्द आ रहा है मुझे इस संसार के भोगों में तनिक भी रस नहीं आता केवल ईश्वर की भक्ति भजन में ही रस आता है इसलिए मुझे आज्ञा दीजिए मैं अभी से ही ईश्वर की भक्ति व तपस्या में जीवन सफल करना चाहता हूँ. जयपुर में सत्संग के दौरान पूज्य सन्त स्वामी मनोहर प्रकाश जी महाराज ने सत्संग के दौरान स्वयं के रचित भजन को गाया जिसमें मनुष्य जन्म को प्रभात बताया गया है चौरासी लाख योनि को गहरी रात बताया गया है जैसे रात्रि में अंधेरा होने के कारण कोई भी कार्य करना मुश्किल होता है एवं प्रभात होते ही प्रकाश में सारे कार्य आसानी से हो सकते हैं वैसे ही ईश्वर की कृपा से हमें मनुष्य जन्म का सुअवसर मिला है जो चौरासी लाख योनियों में प्रभात के समान है इस अवसर का लाभ लें भक्ति करें शुभ कर्म करें परोपकार करें अन्य जन्मों में यह संभव नहीं है अत: ईश्वर को प्रसन्न कर उसका साक्षत्कार करें अपने अन्दर के नेत्रों को खोल कर देखो मुरली मनोहर ईश्वर सामने खड़े दिखेंगे उनका दर्शन कर उनसे अपने दिल की बातें करो फिर यह दुर्लभ अवसर नहीं मिलेगा।