शरीर को छोड़ कर एक दिन जाना ही पड़ेगा यह दुनिया केवल दर्शन मात्र है – संत लोकेश कुमार
प्रेमप्रकाश आश्रम में चालीहा महोत्सव के तहत रोजाना हो रहे धार्मिक आयोजन

धमतरी। आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 139 वें जन्मोत्सव पर आयोजित चालीहा महोत्सव के 36 वे दिन के चालीसा पाठ एवं सत्संग का आयोजन पूर्व मुखी अमरपुरवासी सच्चानंद वाधवानी, एवं उनके भाइयों का परिवार है के सदस्यों गोवर्धनदास, दिनेशकुमार,समाज के उपाध्यक्ष रामचंद्र, बंटी ,यश एवं मनीष वाधवानी के परिवारों ने मिलकर श्री प्रेम प्रकाश आश्रम परिसर में भजन के साथ भोजन का भंडारा भी कराया। स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने बताया है कि हरि के पावन निज धाम में साधक बन कर वही तितिक्षा धारी महापुरुष ही पग आगे बढ़ा सकता है जो सर्दी-गर्मी सुख -दु:ख को सामान रूप से सहन करने का साहस रखता है। सत्संग में हिमांचल प्रदेश से पधारे संत यश कुमार के सानिध्य में आश्रम के संत लोकेशकुमार ने बताया कि ईश्वर ने अपने रहने के लिए यह शरीर रूपी बहुत ही सुन्दर महल बनाया है इस शरीर रूपी महल में रहने वाला जीव इसे मेरा मेरा करके अभिमान करता है जबकि यह घर उसका है ही नहीं जीव को इसको छोड़ कर एक दिन जाना ही पड़ेगा यह दुनिया केवल दर्शन मात्र का ही मेला है जिसमें हर जीव अकेला है ईश्वरीय माया ने जीव को कर्म रूपी बंधन में बांध लिया है इस जीव का कर्म ही उसके साथ जाने वाला है कर्म के प्रभाव से कोई बच नहीं पाएगा चाहे वो गुरु हो या चेला हो। अपने अपने कर्मों से वे बंधे हुए है। कर्मों के अनुसार ही उनका भविष्य तय होता है सभी जीवों में यातना एवं सुखों की अनुभूति उनके अपने कर्म ही तय करते हैं। कर्मों का हिसाब किताब तो होगा ही होगा इससे कोई नहीं बचा सकता है।
