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श्री कृष्ण पूरी दुनिया के लिए आदर्श और आराध्य है – परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.


धमतरी। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि आज श्री कृष्ण का जन्मदिन है। पूरा देश आज के दिन को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाता है। यादव कुल के नंदन थे श्री कृष्ण। उन्होंने दुनिया को निश्छल प्रेम करना सिखाया। आज ऐसे श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है जिन्होंने स्वयं कर्मयोगी बनकर कर्मयोग की शिक्षा दी। आज जन्माष्टमी का सुंदर पावन पर्व है। हिन्दू धर्म में आज का दिन भगवान विष्णु के अवतार दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। श्री कृष्ण के हजारों मंदिर इस देश में है। जेल में आपका जन्म हुआ था। जीवन में अनेक संघर्षों को आपने जीतकर अपने जीवन को उदाहरण स्वरूप बनाया। आपको कान्हा, किशन, माखनचोर, सांवरिया, नारायण, द्वारकाधीश, श्री कृष्ण आदि अनेक नामों से पुकारा जाता है। आपने अपने आचरण से पूरी दुनिया को निस्वार्थ और निश्छल प्रेम करना सिखाया। संसार में जब जब दानवता फैलती है अर्थात पाप का आग बढ़ता है तब तब भगवान इस धरती पर जन्म लेते है। और पुन: धर्म की स्थापना करने का काम करते है। मानवता के लिए अपना जीवन लगा देते है। ऐसा ही व्यक्तिव इस संसार में पूज्य बन पाता है। ऐसे से एक करूणावान , उदारवादी, कर्मयोगी श्री कृष्ण हुए। श्री कृष्ण आज पूरी दुनिया के लिए आदर्श और आराध्य है। माता पिता जेल में बंद थे। सलाखों के पीछे जेल में आपका जन्म हुआ था। जन्म की रात ही आपको यशोदा माता और नंदपिता के पास गोकुल गांव भेज दिया गया था। वहां पर आपका बचपना व्यतीत हुआ। आपकी बाल लीला बड़ी मनमोहक थी। आप अपनी बाल लीला से सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे। आपने बचपन से ही अपने श्रेष्ठ पराक्रम से अनेक दानवों का वध करके लोगों को भय मुक्त करने का काम किया। आपने धर्म की रक्षा के लिए कंस जैसे पापी, अत्याचारी राजा का वध किया था। हमें भी अपने अंदर के मोह रूपी कंस को मारना है। श्री कृष्ण ने अपने जीवन में अनेक बार धर्म की स्थापना के लिए कार्य किया। इस गीता के माध्यम से आपने पूरे संसार को बताया कि संसार में रहते हुए हमारा कर्म कैसा होना चाहिए । हमें केवल कर्म करना चाहिए, फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। अर्थात हम जैसा फल चाहते है वैसा ही कर्म करना चाहिए। हमें गीता के माध्यम से शरीर और आत्मा का भेद भी श्री कृष्ण ने समझाने का प्रयास किया है। आज के दिन मटकी फोडऩे का कार्यक्रम स्थान स्थान पर होता है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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