स्टेशनपारा व देवार बस्ती में चला रेलवे का बुलडोजर, अब तक 90 प्रतिशत कब्जा हुआ मुक्त
रेलवे, पुलिस, राजस्व व निगम टीम द्वारा कल संयुक्त रुप से चलाया गया कब्जा हटाने अभियान, लगभग 40 मकानों पर चला बुलडोजर

धमतरी। बड़ी रेल लाईन कार्य को गति देने रेल्वे द्वारा नोटिस पश्चात आखिरकार कल स्टेशनपारा से एक और क्षेत्र का कब्जा हटाया। रेलवे के द्वारा कब्जा हटाने कई बार नोटिस दिया गया लेकिन खुद से कब्जा छोडऩे लोग तैयार नहीं थे, इस पर मंगलवार को रेलवे का तोडूदस्ता पहुंचा। स्थानीय पुलिस, राजस्व विभाग तथा नगर निगम की टीम के सहयोग से बुलडोजर चलाकर कब्जा हटाया गया। सबसे पहले देवार बस्ती के पास के 15 मकान जो खाली पड़े थे उन्हें तोड़ा गया, फिर एक एक कर 40 कच्चे पक्के मकानों को ढहा दिया गया। इधर रेलवे की कार्रवाई का खासा असर देवार बस्ती में नजर आया। करीब 50 देवार परिवारों ने तोडफ़ोड़ के डर के कारण खुद से ही अपनी झोपडिय़ों को खाली कर दिया गया। रेलवे की इस कार्रवाई के बाद स्टेशनपारा की करीब 90 प्रतिशत रेलवे जमीन कब्जा मुक्त हो चुकी है। सिर्फ एक हिस्से में कुछ मकान बचे है। उन्हें भी नोटिस थमा दिया गया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि अब तक चार चरणों में कब्जा हटाने की कार्रवाई हो चुकी है। प्रभावितों में कुछ महिमासागर वार्ड के अधूरे पीएम आवास में शिफ्ट हो गये, कुछ किराये के मकान में चले गये तो कुछ अब भी भटक रहे है।
प्रभावितों ने बताया कि रेलवे की नोटिस के बाद से अपने लिए दूसरी व्यवस्था करने भटक रहे है। कलेक्टर जनदर्शन व नगर निगम में भी व्यवस्थापन की मांग किया लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। भटगांव देवार बस्ती के पास शासकीय भूमि का बड़ा टुकड़ा खाली पड़ा है। वहां कच्ची झोपड़ी बनाने गये थे, ताकि कुछ दिन गुजर सके, लेकिन वहां के ग्रामीणों ने झोपड़ी बनाने नहीं दिया।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि अभनपुर व राजिम में मेमू ट्रेन का संचालन शुरु होने के बाद पूरा फोकस धमतरी में जल्द ट्रेन चलाने पर है। इसके लिए मार्च तक की डेडलाइन है। पटरी बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। जनवरी में कुरुद से संचालन शुरु कर दिया जाएगा। वही धमतरी में गुडस टर्मिनल बनाने का काम शुरु करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
रेलवे कार्यवाही से बेघर हुए लोगो का सहारा समाजसेवी पं. राजेश शर्मा

ब्राडगेज निर्माण कार्य हेतु रेलवे द्वारा भूमि खाली कराने की प्रक्रिया बुधवार सुबह स्टेशन पारा क्षेत्र में शुरू की गई। निर्धारित समय सीमा के अनुसार पहुंचे रेलवे अधिकारियों एवं भारी पुलिस बल ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की तो क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। रेलवे भूमि पर रह रहे परिवारों ने अपना सामान समेटना शुरू किया और पुरानी मंडी की ओर रवाना होने लगे। ठिठुरन भरी सर्दी में बेघर होने पर प्रभावितों ने स्थानीय प्रमुख जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सर्दियों में हमें बेघर नहीं किया जाना चाहिए था, लेकिन रेलवे प्रशासन के दबाव में सभी चुप रहे। दूधमुंहे बच्चों, महिलाओं और वृद्धजनों को साथ लेकर लोग किसी नए आशियाने की तलाश में निकल पड़े। रेलवे प्रभावित परिवारों के बेघर होने की सूचना मिलते ही समाजसेवी एवं धर्म प्रेमी पं. राजेश शर्मा सहायता के लिए आगे आए। प्रभावितों की पीड़ा को महसूस कर समाजसेवी पं. राजेश शर्मा ने तत्काल तिरपाल की व्यवस्था सभी परिवारों के लिए कराई। इससे बेघरो को काफी राहत व तिरपाल का सहारा इस ठंड के मौसम में मिल पायेगा। सेवा कार्यों के कारण सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट पहचान वाले पं. शर्मा ने प्रभावितों की मांग के अनुरूप राहत सामग्री उपलब्ध कराई। ठंड से बचने कंबल तथा तालपत्री देकर अस्थायी रूप से रहने की व्यवस्था कराने की पहल की। प्रभावितों ने पं. शर्मा का आभार व्यक्त किया।
