मोबाइल, इंटरनेट के दौर में आज भी कई बच्चे है पंतगबाजी के शौकीन
इंडोर एक्टिविटी के दौर में कई बच्चें फिर से लेने लगे है पतंगबाजी का लुफ्त

धमतरी। कुछ साल पहले विशेषकर गर्मी के मौसम में शाम को आसमान में सैकड़ो पंतग उड़ते दिखाई पड़ते थे, लेकिन बीते कुछ सालों में पंतगबाजी का क्रेज घटता गया या कहे कि लगभग समाप्ति की ओर चला गया तो अतिश्योक्ति नहीं होगी लेकिन इस वर्ष ठंड के मौसम में भी बच्चे पतंग उड़ाने का लुफ्त उठाने लगे है। पहले जहां आसमान में पतंग नजर नहीं आता था अब कुछ पतंग दिखने लगे है।
बता दे कि शहर में पहले पतंग और मांझे की कई दुकाने हुआ करती थी, लेकिन अब चुनिंदा दुकानेे ही रह गई है। वह भी सिर्फ पतंग मांझा बेचकर नहीं चल सकती इसलिए कुछ पुराने दुकानदार अन्य सामानों के साथ पतंग मांझा भी बेच रहे है। दुकानों में आजकल विशेषकर छुट्टियों के दिनों में ज्यादा ग्राहकी नजर आने लगी है। बच्चे पतंग उड़ाने हेतु पतंग खरीदने पहुंचते है। इसलिए आजकल आसमान में कुछ पतंग नजर आ जाता है।
ज्ञात हो कि बीते कुछ सालों में पारम्परिक आउटडोर गेम्स के स्थान पर इंडोर गेम्स बच्चें ज्यादा खेलने लगे है। इसका बड़ा कारण मोबाईल, इंटरनेट और कई गैजेट्स है। बच्चें से लेकर बुढो तक सभी मोबाईल इंटरनेट के दीवाने है। घर बैठे गेम्स व मूवी, वीडियों देखना ज्यादा पसंद करते है। यहीं कारण है कि पतंगबाजी जैसे आउटडोर गेम्स का क्रेज घटता ही गया। लेकिन कई बच्चें ऐसे है जो अब पतंग उड़ाने शौकीन नजर आते है।
पढ़ाई का बोझ भी है कारण
छोटे बच्चों से लेकर हायर सेकेण्डरी और कॉलेज के बच्चों पर भारी-भरकम कोर्स की पढ़ाई का दबाव रहता है। यहां तक कि कई घंटो की स्कूल शिक्षा के बाद छोटे बच्चें अलग से ट्यूशन भी करते है। फिर होमवर्क इस बिजी शेड्यूल में बच्चों के साथ पढ़ाई स्कूलिंग के बाद ज्यादा समय बच नहीं पाता इसलिए भी वे आउटडोर गेम्स के प्रति एक्टिविटी दिखा नहीं पाते। साथ ही पतंगबाजी के लिए छत या खुला आसमान वाली जगह की आवश्यकता होती है। शहर में जगह की कमी भी होती है। और छत पर बच्चों के पतंग उड़ाने के दौरान परिजनों की उपस्थिति सुरक्षा की दृष्टि के जरुरी भी होती है। इसलिए भी पतंगबाजी पिछले सालों में घटी है।

