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हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है मकर संक्रांति पर्व, घरों में बनाये गए तिल के लड्डू

मकर संक्रांति सूर्य उपासना का है पर्व, स्नान एवं तिलदान का है विशेष महत्व

रुद्रेश्वर घाट में भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकी

धमतरी। मकर संक्रांति पर्व को लेकर लोगों में उत्साह है। आज क्षेत्रवासी हर्षोल्लास से पर्व मना रहे हैं। अलसुबह रुद्रेश्वर घाट में आस्था की डुबकी भक्तों ने लगाई। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति में तिल के लड्डू एवं तिल से बने सामाग्रियों का विशेष महत्व रहता है. इसके तहत पर्व के एक दिन पूर्व होटल सहित अन्य दुकानों में तिल के लड्डू एवं तिल से बने सामाग्रियों की खूब पूछपरख हुई. साथ ही आज मकर संक्रांति पर सभी मंदिरों में सुबह भक्तों का तांता लगा. जहां वे देवी-देवता के दर्शन एवं तिल से बने सामाग्री भेंट कर मनवांछित फल की कामना किये। घरो में भी तिल के लड्डु तैयार किये जा रहे है। परम्परानुसार मकर संक्राति पर पतंगबाजी की जाती है। लेकिन विगत कई सालों से यह परम्परा भी खत्म होते जा रही है। शहर के पतंग दुकानों में हालांकि लोग पतंग लेने पहुंचे लेकिन पहले की तुलना में पतंगबाजी काफी कम हो गई है।
वही मकर संक्रांति में तिल दान का विशेष महत्व है। इसलिए इस दिन तिल के लड्डू सहित इससे बने खाद्य सामाग्री की मांग रही। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति सूर्य उपासना का पर्व है। इसमें स्नान एवं तिलदान का विशेष महत्व है। तिलदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन अलसुबह नदी-तालाब में पुष्य स्नान करने से रोग दूर होने के साथ मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि, इस दिन सूर्य उपासना और दान-दक्षिणा करने से सुख-समृद्धि और वैभव बढ़ता है। शास्त्रों की मानें, तो मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ का लेन-देन, तिल से मालिश और खिचड़ी सेवन का विशेष महत्व होता है। यह रिश्तों में मिठास, प्रेम और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इसके अलावा मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर होते हैं।

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