जीवन का एक लक्ष्य बनाना है कि अंत में मैं भी महावीर जैसा बन जाऊं – परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.

धमतरी। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि आज पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का दूसरा दिन है। प्रवचन के प्रारंभ में पहले पांच ज्ञान की पूजा की गई। उसके बाद श्री कुंदनमल जी रानूलाल जी पारख परिवार द्वारा श्री कल्पसूत्र जी गुरुभगवंत को बोहराया गया। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व में इस ग्रंथ का श्रवण पूरा श्री संघ महाराज साहेब के मुखारबिंद से करेंगे। संसार का तीन स्वरूप है, असार इस संसार में कोई सार नहीं है। संसार का प्रेम संसार को बढ़ाने वाला ही है। इस संसार में रहकर संसार के सार को इस सूत्र के माध्यम से समझना है। अशरण, इस संसार में कोई हमे शरण देने वाला नहीं है। संसार संसार में हम किसी की भी शरण ले लें। किंतु फिर भी जीवन से भय समाप्त नहीं हो सकता। अर्थात संसार में किसी का भी शरण व्यक्त है। अनित्य यह संसार अनित्य है अर्थात नाशवान है। श्री संघ इन पर्व के दिनों में इस कल्पसूत्र ग्रंथ का श्रवण करेंगे। इस सूत्र के माध्यम से अपने जीवन को देखने का प्रयास करना है। इस सूत्र का श्रद्धा पूर्वक श्रवण करके , फिर जीवन में उतारकर हम भी परमात्मा जैसा बन सकते है। जीवन का एक लक्ष्य बनाना है कि अंत में मैं भी महावीर जैसा बन जाऊं। इस ग्रंथ में प्राचीन संस्कृति का दर्शन होता है। इस ग्रंथ को हमें कान से नहीं बल्कि श्रद्धा रूपी कान से सुनना है। इस ग्रंथ को विवेक के आंख से देखना है। यह ग्रन्थ हमें दुर्गति से दूर कर सकता है। इसके माध्यम से दुख के रास्तों को बंद करना है। यह ग्रन्थ पूज्यनीय भी है और प्रेरक भी। इस ग्रंथ की हम पूजा तो करते है अब इससे प्रेरित होकर आत्मा को परमात्मा बनाने का प्रयास करना है। वास्तव में कल्पसूत्र जीवन जीने की कला है इसे श्रद्धा पूर्वक सुनकर जीवन में उतारने वाला स्वयं भगवान बन सकता है।
