Uncategorized

जो बंधन में रहेगा वह कष्ट महसूस करेगा किंतु जो वंदन में रहेगा वह हमेशा आनंद में रहेगा- श्री संकर्षण शरण

धमतरी-रुद्री रोड हनुमान मंदिर में चल रही हनुमान कथा में परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए आज सुंदरकांड की कथा बताएं, सुंदरकांड की कथा में गुरुजी बताए कि जो संसार के बंधन में बंधे होते हैं वह कष्ट महसूस करते हैं संसार में रहकर जो संसार से अलग होते हैं बंधन मुक्त होते हैं ,जो पूरे समय भगवान के ध्यान में रहते है, भगवान के वंदन में रहते है,वह हमेशा आनंद में होते है।हनुमान जी बंधन में नहीं है हनुमान जी भगवान के बंधन में नहीं,वंदन में है,इसलिए आनंद में है। रावण की सभा में हनुमान जी बंदी बनकर भी आनंद में है,आगे गुरुदेव बताए कि विद्वान व्यक्ति हमेशा हर चीज में तर्क करते हैं किंतु ज्ञानी व्यक्ति सरल होते हैं आवश्यकता पड़ने पर बोलते हैं। ज्ञानी व्यक्ति के पास विनम्रता हो सकती है विद्वानों के पास विनम्रता नहीं होती है। रावण विद्वान है ज्ञानी नहीं है और हनुमान जी ज्ञानी है ज्ञानी सरल होते हैं ज्ञानी शास्त्रार्थ नहीं करते और विद्वान हर बात में उलझे रहेंगे एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते रहेंगे,विवाद चलता रहेगा और ज्ञानियों में कोई शस्त्र नहीं होता विद्वानों के पास अहंकार होता है पढ़ने का अहंकार हमने इतनी किताबें पढ़ ली है वह विद्वान होते हैं उनको पढ़ने का अहंकार होता है और ज्ञानियों को जानने का अहंकार नहीं होता क्योंकि ज्ञानी अंदर से जानता है अंदर का अंधकार दूर कर लेता है अपने साधन के बल पर और अंदर से प्रकाश भरता है और जब जान लेता है तो अहंकार विहीन हो जाता है भगवान का भक्त हो जाता है सरल हो जाता है । हनुमान जी अपनी सरलता के कारण राम के सबसे प्रिय भक्त होते हैं। काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही कथा के अंत में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया लोग दूर-दूर से चलकर भी कथा सुनने आते जा रहे हैं कल लंका दहन की कथा बताई जाएगी।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!