धमतरी जिला हुआ नक्सल मुक्त : एसपी सूरज सिंह परिहार के 10 महीने के कार्यकाल में 10 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
एसपी के नेतृत्व में जिला पुलिस व जिलेवासियों के लिए कल रहा बड़ा दिन, लाल आतंक के स्थान पर अब दिखेगा विकास का प्रभाव
लगातार दौरे, सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर, बहके लोगों को समाज के मुख्यधारा में जोडऩे का प्रयास लाया रंग

धमतरी । कल 23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी का दिन जिले के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरो में दर्ज हो गया। लगभग दो दशक तक नक्सल प्रभाव में रहा धमतरी जिला अब नक्सल मुक्त हो चुका है। इसका श्रेय वैसे तो कई अधिकारियों व राज्य सरकार को जाता है, लेकिन विशेषकर धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मात्र 10 महीने के कार्यकाल में 10 खूंखार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। वहीं कई नक्सली पूर्व में पुलिस के दवाब के चलते जिले का बार्डर छोड़ चुके थे। कल 47 लाख के ईनामी घोषित 9 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। जो कि जिले के नक्सल ताबूत की आखिरी कील साबित हुई।
एसपी सूरज सिंह परिहार जब से जिले में पदस्थ हुए है सामाजिक बुराईयों, गंभीर अपराधो पर रोकथाम के सत्त प्रयास करते रहे है। जिसमें उन्हें सफलता भी मिली है। साथ ही जिले की नक्सल समस्या पर भी वे शुरु से वे गंभीर रहे। तैनात सुरक्षा बलों के साथ बेहतर समन्वय के साथ कार्य करते हुए सूचना तंत्र को और मजबूत करने में सफल रहे। वे लगातार नक्सल प्रभावित क्षेत्रो के दौरे पर रहे। सामुदायिक पुलिसिंग पर विशेष जोर दिया। घोर नक्सल इलाकों में युवाओं के लिए अनेक खेल स्पर्धाएं आयोजित की गई। बहके हुए लोगों को नक्सली विचारधारा से मोड़कर समाज की मुख्यधारा में जोडऩे के प्रयास किया। एसपी के नेतृत्व में जिला पुलिस का यह प्रयास अब पूरी तरह सफल साबित हो रहा है। पहले जहां घोर नक्सल इलाको में लाल आंतक नजर आता था अब उन क्षेत्रो में शासन की कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के साथ ही विकास का प्रभाव नजर आएगा।
20 सालों के बाद नक्सल आंतक समाप्त
लगभग 20 साल पूर्व साल 2005 में धमतरी जिले के नगरी सिहावा क्षेत्र उड़ीसा बार्डर है घनी जंगल व पहाड़ो का फायदा उठाकर नक्सली जमावड़े की शुरुआत हुई। नक्सली उक्त क्षेत्रो को कॉरिडोर के रुप में उपयोग करने लगे और धीरे-धीरे नक्सलियों की मौजूदगी साबित होती रही कई बार नक्सलियों व जवानो में मुठभेड़ हुई। साल 2009 में जिले में बड़ी नक्सली वारदात हुई जिसमें 11 जवान शहीद हुए व ड्रायवर की जान गई। इसके बाद पुलिस व नक्सलियों के कई मुठभेड़ हुए आखिरकार नक्सलियों के खूनी खेल की समाप्ति हो गई।
बेहतर पुनर्वास नीति व जिला पुलिस के बेहतर माहौल का असर
केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बेहतर समन्वय बनाकर मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके तहत प्रदेश भर में नक्सलियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही पुलिस के दबाव के चलते अनेक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके है। साथ ही राज्य सरकार के बेहतर पुनर्वास नीति व जिला पुलिस के बेहतर माहौल का असर रहा कि धमतरी जिला क्षेत्र में सक्रिय 9 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।
इन 9 हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
शासन द्वारा प्रतिबंधित संगठन उड़ीसा राज्य कमेटी के धमतरी गरियाबंद नुआपाड़ा डिवीजन के नगरी एरिया कमेटी, सीतानदी एरिया कमेटी तथा मैनपुर एलजीएस का अपने धारित हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया गया जिनमे ज्योति उर्फ जैनी उर्फ रेखा 28 वर्ष ग्राम-पेहा कोरना, थाना एवं जिला बीजापुर 8 लाख रूपये के ईनामी, इंसास हथियार के साथ, उषा उर्फ बालम्मा 45 वर्ष ग्राम चंद्रावली जिला मंचीराला, तेलंगाना डीव्हीसी टेक्नीकल विभाग छग0 में भ्रमण कर माओवादी नक्सलियों के हथियारों की रिपेयरिंग करना। 8 लाख रूपये के ईनामी, इंसास हथियार के साथ, रामदास मरकाम उर्फ आयता उर्फ हिमांशु, पूर्व गोबरा एलोएस कमांडर वर्तमान नगरी एसीएम,5 लाख ईनामी, एसएलआर हथियार के साथ,रोनी उर्फ उमा सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर 5 लाख ईनामी, कार्बाइन हथियार के साथ, निरंजन उर्फ मोदिया सीनापाली एससीएम टेक्निकल (डीजीएन) 5 लाख रूपये का ईनामी, एसएलआर हथियार के साथ,सिंधु उर्फ सोमड़ी एसीएम 5 लाख रूपये के ईनामी, भरमार हथियार के साथ,रीना उर्फ चिरो एसीएम सीनापाली एरिया कमेटी,एलजीएस 5 लाख ईनामी, अमीला उर्फ सन्नी एसीएम मैनपुर एलजीएस 5 लाख रूपये के ईनामी,लक्ष्मी पूनेम उर्फ आरती उषा की बॉडी गार्ड, 1 लाख रूपये के ईनामी,9 माओवादियों द्वारा 5 आटोमेटिक हथियार, 1 भरमार बंदूक के साथ शामिल है।
अपराधो के निराकरण व बेहतर पुलिसिंग में सफल रहे एसपी
एसपी सूरज सिंह परिहार के नेतृत्व में जिला पुलिस लगातार बेहतर पुलिसिंग को अंजाम दे रही है। उनके पदस्थापना के बाद साल 2025 में साल 2024 की तुलना में 841 अपराध कम घटित हुए। वहीं 37 प्रतिशत से अधिक अपराधो में कमी दर्ज की गई। हत्या जैसे गंभीर अपराधो में पुलिस आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में लगभग शत् प्रतिशत सफल रही। इसके अतिरिक्त 2025 में लूट में 44 प्रतिशत, नकबजनी में 43 प्रतिशत, चोरी में 45 प्रतिशत, बलात्कार में 22 प्रतिशत, अपहरण में 23 प्रतिशत, यौन उत्पीडऩ में 87 प्रतिशत, सीलभंग में 58 प्रतिशत, अपराधिक मानव वध में 66 प्रतिशत की कमी आई। वहीं सड़क दुर्घटनाओं व हादसो में मौत के आकड़े भी घटे है।
