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वर्तमान बजट में सोने का वर्क चढ़ा कर कालिख छुपाने का काम मोदी सरकार ने किया है- कविता बाबर

जिला पंचायत सदस्य कविता योगेश बाबर ने कहा किन बजट एक छलावा क़े सामान है इसकी सच्चाई जानना आम जनता के लिये बहुत जरूरी होता है बजट की मूल बात यह होती है कि बजट बनता है सरकार के पास पैसे की उपलब्धता के आधार पर कि सरकार के पास पैसा कितना है और सरकार की देनदारियां कितनी है आर्थिक सर्वेक्षण 2025 की रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इनकम टैक्स, जी एस टी, व अन्य साधनों से आय पिछले वर्ष 28 लाख 37 हज़ार करोड़ रुपये की हुई थी जो इस वर्ष बड़कर 28 लाख 66 हज़ार करोड़ की हुई जो कि पिछले वर्ष के मुक़ाबले 1 प्रतिशत की वृद्धि है जबकि सरकार की कर्ज के ऊपर ब्याज की देनदारी पिछले वर्ष 12 लाख 75 हज़ार करोड़ थी जो कि इस वर्ष १४ लाख करोड़ रुपये हो गई मतलब 10 प्रतिशत की वृद्धि मतलब आय में वृद्धि 1 प्रतिशत व व्यय में वृद्धि 10 प्रतिशत माने 9 प्रतिशत का नुक़सान हो गया इसका मतलब यह है कि सरकार नुक़सान में चल रही है । आजादी के बाद से 2014 तक 65 से 70 साल में जो भी सरकारें सत्ता मे आई उन्होंने कुल 55 लाख करोड़ का कर्ज लिया था लेकिन मोदी सरकार ने 2014 से लेकर अब तक इस कर्ज को बढ़ाकर 225 लाख करोड़ के आंकड़े तक पहुँचाने का काम किया है जो कि 11 साल में लगभग 4 गुना ज़्यादा ये सब आँकड़े इस सरकार की नाकामी व कथनी और करनी में अंतर बता रहे हैं कहाँ गये आपके पिछले बजट के वादे बुलेट ट्रेन स्मार्ट सिटी वो तो पूरे नहीं हुए फिर एक नया डिंढोरा पीटने का काम शुरू हो गया है देश का ग़रीब व मध्यम वर्गीय परिवार परेशान है लोगो के पास क्रय शक्ति नहीं है जिस देश के 80करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है 30 करोड़ लोग बैंक के कर्ज में डूबे है उनकी अपनी कमाई का 40 प्रतिशत हिस्सा किश्त जमा करने में जा रहा है बाजार में हर चीज महंगी बिक रही है शिक्षा चिकित्सा ग़रीब व्यक्ति के पहुँच से बाहर हो गई है.आज मोदी सरकार अपनी तुलना चाइना अमेरिका जैसे देशों से करते दिखते हो व विश्व गुरु का डंका बजा रहे हो जबकि सच्चाई यह है कि हम उन देशों के रिसर्च टेक्नोलॉजी कृषि शिक्षा के क्षेत्र में उनके बजट का 0.1 प्रतिशत का भी प्रावधान नहीं कर रहे हैं तो फिर भारत कैसे विकसित राष्ट्र बनेगा इस पर संदेह होना लाजिमी है मोदी सरकार के द्वारा कागजों पर ही काम चल रहा है हकीकत इससे बहुत अलग है आज की स्थिति में भारत आर्थिक गुलामी की ओर अग्रसर होता जा रहा है भारत एक कृषि प्रधान देश है और जब तक किसान मछुवारों डेयरी सेक्टर में सही तरीक़े से काम नहीं करेंगे तब तक यह देश विकसित नहीं होगा झूठे काग़ज़ी आँकड़े व मुंगेरी लाल के सपने देखना बंद कर सरकार को किसानो मध्यम वर्गीय व्यापारियों युवाओ को रोज़गार दिलाने की दिशा में काम करने जरूरत है चौबीसों घंटे चुनावी मोड से निकलकर जनता व देश हित के मुद्दों पर काम करने की ज़रूरत है स्व गुणगान करने की बजाय राष्ट्र का गुणगान होगा तभी भारत विकसित भारत बनेगा ।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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