आज मध्य रात्रि होगा होलिका दहन, कल ग्रहण समाप्ति के बाद भी कई स्थानों पर होगा होलिका दहन
शहर में 120 से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन
होली बाजार में बढ़ी रौनक, रंगो की खरीददारी करने पहुंच रहे लोग
शांतिपूर्ण पर्व सम्पन्न कराने जिला पुलिस प्रशासन ने की तैयारी

धमतरी। आज रात से होलिका दहन शुरु होगा वहीं कल रात्रि भी कई स्थानों पर होलिका दहन होगा। फिर होली 4 मार्च को खेली जायेगी। शहर के 40 वार्डो में लगभग 120 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन होगा।
बता दे कि इस बार होलिका दहन को लेकर लोगो में असमजस्य की स्थिति बनी हुई है। कल 3 मार्च को फागुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होना था, लेकिन चन्द्र ग्रहण होन के कारण एक दिन पूर्व ही आज रात होलिका दहन को उपयुक्त मुहूर्त बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि होलिका दहन के लिए आज मध्य रात्रि से प्रारंभ होगा। उसके पश्चात 3 मार्च को शाम 6 बजकर 7 मिनट को चद्रग्रहण प्रारंभ होगा जो कि 6.50 तक रहेगा। इसके पूर्व सुबह लगभग 9 बजे सूतक लग जाएगा। जिससे शुभ कार्य वर्जित हो जाएगा। मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। बता दे कि शहर में कई स्थानों पर ग्रहण समाप्ति के पश्चात मंगलवार की रात को होलिका दहन किया जाएगा।
ज्ञात हो कि होलिका दहन हेतु युवाओं द्वारा आपसी सहयोग व चदां कर पैसों की व्यवस्था की जाती है। साथ ही कई दिन पूर्व से ही होलिका के लिए लकड़ी इक्कठा किया जा रहा है। शहर में रंगो के साथ ही नंगाड़ो का बाजार भी सजा है। इस संबंध में नंगाड़ा विक्रेताओं ने बताया कि सबसे छोटे नगाड़ों की जोड़ी 150 रुपये तक बेच रहे है। इसके बाद 3000 रुपये जोड़ी तक नगाड़ों की वैरायटी है। इसी प्रकार रंगो का बाजार सजा हुआ है। रंगो की खरीदी बिक्री जोरशोर से हो रही है। होली पर्व शांति सौहाद्रता व भाईचारे का प्रतीक है। लेकिन शराबियों हुड़दंगियों असामाजिक तत्वों की हरकतों के कारण पर्व पर माहौल बिगडऩे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा पर्व को शांति सुरक्षा के सम्पन्न कराने तैयारियां की गई है।
कंडो से ही जलाए होली
होलिका दहन हमारी सनातन धर्म और परम्परा का प्रतीक है। पर्व पर अब आधुनिकता का रंग हावी हो गया है। बता दे कि शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन गोबर के कंडो से करना चाहिए। पुरातन काल से ही यही परम्परा चली आ रही है। अब कंडो का उपयोग काफी कम हो गया है। कुछ स्थानों पर सिर्फ लकड़ी पालीथीन आदि से भी होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन हवन व यज्ञ के समान होता है। इसके दहन से वातावरण दूषित नहीं होना चाहिए। बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना चाहिए। इसलिए शास्त्र सम्मत होलिका दहन में कंडो का ही प्रयोग करना चाहिए।
घटते जा रहा है हरवा माला का महत्व व डिमांड

होली पर्व पर जितना महत्व रंगो का है उतना ही महत्व बुजुर्गो द्वारा हरवा माला का भी बताया गया है। हालांकि साल दर साल हरवा माला का महत्व व डिमांड अब घटते जा रही है। चकाचौंद के दौर में पौराणिक परम्परा अब विलुप्त हो रही है। लेकिन जानकार लोग आज भी होली पर हरवा माला पहनते है। जानकारों की माने तो होली पर्व संबंधो में मिठास, गिलेशिकवे दूर करने का पर्व है। हरवा माला शक्कर से बना होता है। इसलिए इसमें भरपूर मिठाई होता है। यह संबंधो में मिठास का प्रतीक है। होली पर्व पर जब लोगों से गले मिलकर बधाई दी जाती है तो मुहमीठा कराने हरवा माला का उपयोग किया जाता है।
कम हुई नंगाड़ो की थाप

साल दर साल होली पर्व के पूर्व बजने वाली नंगाड़ों की थाप कम होने लगी है। पहले पखवाड़े भर पूर्व से ही नगाड़ो की थाप सुनाई पड़ती थी। लेकिन अब होली के एक दो दिन पहले ही यदि नंगाड़े बज जाये यही बहुत है। होली पर आधुनिकता का रंग भी चढऩे लगा है। होली पर्व के दौरान व पहले विभिन्न कक्षाओं की परीक्षाएं भी है। इसका असर भी नंगाड़ो की बिक्री पर पड़ा है।