एग्रीस्टेक के बिना भी किसानों को मिलेगा खाद, जिले में पर्याप्त भंडारण उपलब्ध
नैनो यूरिया एवं ड्रोन तकनीक से समय, श्रम और लागत में होगी बचत किसान करें उपयोग

किसानों ने नैनो यूरिया उपयोग पर साझा किए अनुभव
धमतरी- खरीफ सीजन के मद्देनजर किसानों को खाद वितरण की व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाया गया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता नहीं है। जिले की सभी प्राथमिक कृषि साख समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने बताया कि जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके सहित विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। वर्तमान में जिले में कुल 20 हजार 740 मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है, जिसमें से अब तक 7 हजार 599 मीट्रिक टन खाद का उठाव किसानों द्वारा किया गया है। जिले में लगभग 17 हजार 141 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है तथा मांग के अनुरूप लगातार वितरण किया जा रहा है।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि कई साख समितियों में ड्रोन सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव कम समय में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इससे किसानों के श्रम, समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आती है तथा फसलों को आवश्यक पोषक तत्व बेहतर तरीके से प्राप्त होते हैं। नैनो यूरिया पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रहा है।
किसानों ने साझा किए सकारात्मक अनुभव
धमतरी विकासखंड के लोहरसी ग्राम के किसान हरिराज सिन्हा ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से पांच एकड़ धान फसल में नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार यह कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है तथा लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि पहले उर्वरक के परिवहन एवं छिड़काव में दो से तीन दिन का समय लगता था, जबकि ड्रोन तकनीक से यह कार्य कुछ घंटों में पूरा किया जा सकता है, जिससे लगभग 20 प्रतिशत लागत की बचत होती है।
लोहरसी के ही किसान योगेश कुमार साहू भी पिछले दो वर्षों से अपने डेढ़ एकड़ खेत में नैनो यूरिया का उपयोग कर धान की खेती कर रहे हैं। कुरूद क्षेत्र के किसान श्री देवेंद्र ने बताया कि नैनो यूरिया के प्रयोग से उर्वरक की मात्रा कम लगी तथा उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला, जिसके चलते उन्होंने इस वर्ष अपने संपूर्ण रकबे में इसका उपयोग करने का निर्णय लिया है।
मगरलोड क्षेत्र के किसान मोहन ने बताया कि पहले मजदूरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होती थी, जबकि ड्रोन तकनीक से समय एवं श्रम दोनों की बचत हुई है। वहीं धमतरी विकासखंड की किसान श्रीमती संगीता साहू ने कहा कि नैनो यूरिया के उपयोग से खेती की लागत में कमी आई है तथा फसल की बढ़वार भी बेहतर हुई है।
पॉस मशीन से हो रहा पारदर्शी वितरण
कृषि विभाग द्वारा यूरिया, डीएपी, पोटाश सहित सभी उर्वरकों का वितरण पॉस मशीन के माध्यम से किया जा रहा है। इससे प्रत्येक किसान को उसकी जोत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है। खाद की कालाबाजारी एवं अधिक कीमत पर बिक्री रोकने के लिए उड़नदस्ता दलों द्वारा सहकारी समितियों एवं निजी विक्रेताओं का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।
जिले की 96 सहकारी समितियों में खाद का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया गया है तथा भंडारण केंद्रों की नियमित निगरानी की जा रही है। मार्कफेड एवं सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की सतत आपूर्ति जारी है। साथ ही नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। 225 रुपये में उपलब्ध 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल पारंपरिक यूरिया के बराबर पोषक तत्व प्रदान करती है।
किसानों से अपील
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की खरीदी केवल अधिकृत सहकारी समितियों अथवा लाइसेंसी विक्रेताओं से ही करें। किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा अधिक कीमत वसूले जाने की स्थिति में किसान जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष क्रमांक 07722-232249 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन का प्रयास है कि खरीफ सीजन में किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना न करना पड़े तथा समय पर पर्याप्त खाद एवं बीज उपलब्ध कराकर जिले में खरीफ फसलों का रकबा एवं उत्पादन बढ़ाया जा सके।
